करीब छह माह तक सीवरेज निर्माण कार्य के नाम पर पटेल नगर से बल्लभ गार्डन को जोड़ने वाला मुख्य रास्ता पूरी तरह बंद रहा। लोगों ने धूल, कीचड़ और जाम को सहते हुए सब्र रखा, यह सोचकर कि काम पूरा होते ही राहत मिलेगी। लेकिन अब जब सीवरेज का काम पूरा हो चुका है, तब भी सड़क की हालत ऐसी है कि मानो काम शुरू ही नहीं हुआ हो। गड्ढों, टूटी सतह और उखड़ी मिट्टी से भरा यह मार्ग आज भी चलने लायक नहीं है। स्थिति इतनी खराब है कि एक फोर व्हीलर तक सुरक्षित नहीं निकल सकता। यह सड़क सिर्फ एक गली नहीं, बल्कि रोजाना सैकड़ों लोगों की आवाजाही का मुख्य मार्ग है। इसके बावजूद प्रशासन की आंखों पर पट्टी बंधी हुई है। काम पूरा होने के बाद सड़क को दुरुस्त करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी थी, लेकिन जिम्मेदारी निभाने के बजाय फाइलें ठंडी की जा रही हैं। नतीजा यह है कि लोग जानबूझकर इस रास्ते से बचने लगे हैं और मजबूरी में लंबा चक्कर काटकर दूसरे रास्तों से आना-जाना कर रहे हैं। यह लापरवाही केवल असुविधा नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण है। सवाल साफ है क्या प्रशासन जागेगा, या यह सड़क यूं ही बदहाली का प्रतीक बनी रहेगी।


