रेलवे VS पीडब्ल्यूडी के पचड़े में फंसे दो बड़े प्रोजेक्ट:डूमरतालाब सड़क अधूरी, ओवरब्रिज अप्रैल-25 की जगह मार्च-26 में बनेगा

पीडब्ल्यूडी के अफसरों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अफसरों ने रेलवे के बिना अनुमति के ही उसकी जमीन में रविशंकर विश्वविद्यालय से डूमरतालाब तक करीब 2 किमी लंबी सड़क निर्माण के लिए पांच करोड का टेंडर जारी कर दिया। ठेका एजेंसी सड़क पर गिट्‌टी बिछाने का काम भी शुरू कर दिया। बिना मंजूरी रेलवे की जमीन पर PWD बना रहा था 5 करोड़ की सड़क, 4 साल से रुका है काम रेलवे के अफसरों को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने निर्माण पर रोक लगा दी। अब 5 करोड़ की लागत से बनने वाली सड़क पिछले चार वर्षों से अधूरी पड़ी है। गिट्टी पड़ी होने से सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। बताया जाता है कि जब निर्माण कार्य शुरू हुआ, तभी रेलवे ने आपत्ति जताई और कहा कि सड़क उनकी भूमि में बनाई जा रही है। इसी विवाद के चलते काम रोक दिया गया और आज तक दोबारा निर्माण शुरू नहीं हो पाया। इस सड़क के निर्माण हो जाने से बड़ी आबादी को सीधा फायदा होता। इसके बन जाने से रविवि की ओर से रिंग रोड क्रमांक-1 तक पहुंच आसान हो जाता। अभी ओवरब्रिज पार करने के बाद अंडरब्रिज क्रॉस कर डूमरतालाब होते हुए लोग रिंग रोड-1 जाते हैं। ईएनसी बोले- जांच करेंगे
कौन अधिकारी था, उसने रेलवे से परमिशन क्यों नहीं ली, बिना परमिशन निर्माण कैसे कर दिया गया और शासन को इससे कितना नुकसान हुआ? इस बारे में जानकारी जुटाई जाएगी।
-वीके भतपहरी, ईएनसी पीडब्ल्यूडी पांच साल से बन रहा कचना ब्रिज 90% पूरा, 18 गर्डर चढ़ाने फिर चला चिट्ठियों का खेल कचना समेत आसपास के एक दर्जन से ज्यादा इलाकों के करीब एक लाख लोगों को रोजाना राहत दिलाने के लिए कचना रेलवे लाइन के ऊपर नया ओवरब्रिज बनाया जा रहा है। इसका 90 फीसदी काम पूरा हो गया है। लेकिन 3 स्लैब और 18 गर्डर चढ़ाने के लिए रेलवे से अनुमति नहीं मिलने की वजह से काम पूरा नहीं हो पा रहा है। इस रेलवे लाइन में हर दिन 10 से 15 मिनट में फाटक बंद किया जाता है। इस वजह से लोगों को रुकना पड़ता है। इसमें उनका खासा समय खराब होता है। इतना ही नहीं रेलवे फाटक में रुकने की वजह से लोग जाम में भी फंसते हैं। कचना के आसपास बड़े अस्पताल, कोचिंग सेंटर, स्कूल, कॉलेज और कई बड़े कारपोरेट दफ्तर भी हैं। यहां सुबह से शाम तक लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इस वजह से परेशानी और बढ़ रही है। पीडब्ल्यूडी वालों ने दावा किया था कि ओवरब्रिज का काम अप्रैल 2025 में पूरा हो जाएगा। लेकिन बार-बार काम रुकने की वजह से अब दावा किया जा रहा कि ओवरब्रिज का काम मार्च 2026 में पूरा होगा। यानी लोगों को अभी तीन महीने तक और परेशान होना पड़ेगा। इससे लोग खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि जब 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है तो 10 फीसदी काम के लिए इतना समय क्यों लगाया जा रहा है। हर 10 मिनट में गुजरती है एक ट्रेन
रायपुर विशाखापट्टनम रुट पर यात्री ट्रेनों के साथ ही बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी गुजरती हैं। औसतन हर 10 से 12 मिनट में एक ट्रेन गुजरती है। इसके लिए फाटक बंद किया जाता है। ट्रेन के गुजरने के पांच मिनट पहले रेलवे क्रासिंग को बंद कर दिया जाता है। ऐसे में स्कूल और ऑफिस जाने वालों को ज्यादा परेशानी होती है। गर्डर चढ़ाने 6 घंटे का ब्लॉक
कचना रेलवे लाइन के ऊपर गर्डर और स्लैब चढ़ाने के लिए रेलवे को करीब 6 घंटे का ब्लॉक लेना पड़ेगा। रेलवे अफसरों का कहना है कि मेन रेल लाइन होने की वजह से बड़ी संख्या में ट्रेनें प्रभावित होंगी। ट्रेनों का परिचालन तय करने, सुरक्षा कर्मी और स्टाफ की पर्याप्त संख्या के बाद ही इसकी अनुमति दी जाएगी। इसके लिए सभी संबंधित विभागों के अफसरों से बात हो रही है। मुख्य बैठक होने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। ओवरब्रिज का काम 2021 से चल रहा
पीडब्ल्यूडी के अफसरों के अनुसार कचना ओवरब्रिज का निर्माण 2021 से चल रहा है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस ओवरब्रिज को बनाने की अनुमति दी थी। विभाग में काफी जद्दोजहद के बाद इसका टेंडर फाइनल हुआ। अक्टूबर 2023 में काम शुरू हुआ। पीडब्ल्यूडी को इसे अप्रैल 2025 तक पूरा करना था। लेकिन अफसरों की लापरवाही के चलते काम तय समय पर पूरा नहीं हो पाया है। अब इसे मार्च 2026 में पूरा करने का दावा किया जा रहा है। रेलवे से मांगी है अनुमति
कचना ओवरब्रिज के लिए रेलवे लाइन के ऊपर स्लैब व गर्डर चढ़ाने का काम बाकी है। इसके लिए रेलवे से अनुमति मांगी है। अधिकारियों ने जल्द ब्लॉक देने का आश्वासन दिया है।
सीके कोरी, सीई पीडब्ल्यूडी, रायपुर तैयारी के बाद अनुमति देंगे
पीडब्ल्यूडी ने ब्लॉक के लिए अनुमति मांगी है। ऑपरेशन, सिग्नल समेत संबंधित विभाग वालों से बात हो रही है। सभी तैयारियों के बाद ही ब्लॉक की अनुमति दी जाएगी। -अवधेश कुमार त्रिवेदी, सीनियर डीसीएम रायपुर

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