कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार और बीजेपी पर तंज कसते हुए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। डोटासरा ने कहा कि सरकार में भ्रष्टाचार बेलगाम हो चुका है, भ्रष्टाचार का तांडव नृत्य हो रहा है। हर मंत्री बिना लिए-दिए कोई काम ही नहीं करता है। कोई भी अधिकारी किसी प्रोजेक्ट में राज्य के कल्याण की भावना से काम नहीं कर रहा, अफसर प्रोजेक्ट में पार्टनरशिप मांग रहे हैं। जो सोलर बिजली पैदा होगी, वह बाहर जाएगी। जहां से लाइन ले जाई जाएगी, वहां किसानों के खेत बर्बाद हो जाएंगे। सरकारी जमीनों को कोड़ियों के भाव लुटाया जा रहा है। डोटासरा प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। डोटासरा ने कहा कि बीजेपी के प्रदेश प्रभारी क्यों नाराज हैं, वे क्यों नहीं आ रहे हैं, यह भी बताना चाहिए। इनके बीच भारी खींचतान है। बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री आए और उस बैठक में इनके प्रदेश प्रभारी क्यों नहीं आए, उनकी नाराजगी है, तभी तो वे नहीं आ रहे। इनकी सत्ता में दूरी है, संगठन के अंदर दूरियां हैं। मदन राठौड़ क्या कर सकते हैं, वे तो सीएम की पुंगी (एक तरह का वाद्ययंत्र) बजा रहे हैं, सीएम मोदी की और मंत्री इस सरकार की विफलता की पुंगी बजा रहे हैं। मीडिया से डोटासरा ने कहीं ये 3 बड़ी बातें… 1. बीजेपी मुख्यालय की जनसुनवाई तमाशा, गुट पूछकर अंदर बुलाया जाता है
डोटासरा ने कहा कि जनता इस अनुभवहीन सरकार से तंग आ चुकी है। जनता के काम नहीं हो रहे हैं। जो जनसुनवाई की बातें कर रहे हैं, वह तो कार्यकर्ता सुनवाई ही नहीं हो रही। बीजेपी मुख्यालय पर होने वाली सुनवाई में तो मंडल अध्यक्ष अगर आ रहा है, तो पहले बाहर खड़े-खड़े अंदर बताया जाएगा कि यह किस गुट का है। वसुंधरा राजे, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, सतीश पूनिया गुट का मंडल अध्यक्ष है, तो उसको अंदर नहीं बुलाया जाता है। ये अपने पसंदीदा पदाधिकारियों को बुलाकर जनसुनवाई कर रहे हैं। ऐसी जनसुनवाई तो घर पर सोफे पर बैठकर भी हो सकती है। जनता की जनसुनवाई कब होगी? जनता की समस्याओं का समाधान कब करेगी, यह सरकार को बताना चाहिए। कई मंत्री आज महीने भर से सचिवालय नहीं जाते। 2. नो बैग डे पर सत्ता पर चर्चा में क्या बताएंगे? पुरानी एक्टिविटी क्यों बंद कीं
डोटासरा ने कहा कि शिक्षा मंत्री का शिक्षा से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस सरकार के समय स्कूलों में एक दिन नो बैग डे घोषित किया था, उस दिन बच्चे दूसरी एक्टिविटी कर सकते थे, लेकिन अब शिक्षा मंत्री ने उसे बंद कर सत्ता पर चर्चा कराने का फैसला किया है। ये सत्ता पर क्या चर्चा कराएंगे? क्या बच्चों को यह बताया जाएगा कि पर्ची से सीएम कैसे बनते हैं या फिर शिक्षा मंत्री कैसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं? 3. क्या यह बताएंगे अफसर मंत्रियों की नहीं मानते, उनके फोन नहीं उठाते
डोटासरा ने कहा कि क्या बच्चों को यह बताएंगे कि ब्यूरोक्रेसी इतनी हावी है कि अफसर मंत्रियों की नहीं मानते? क्या यह बताएंगे कि 360 डिग्री परीक्षण के आधार पर अधिकारी लगाए गए हैं, जो इनके मंत्रियों की नहीं मानते? क्या यह बताएंगे कि सीएमओ में क्या खेल हुआ, क्या भ्रष्टाचार हुआ कि अधिकारी को हटाना पड़ा, दूसरों को लाना पड़ा? क्या यह बताएंगे कि अफसर मंत्रियों के फोन नहीं उठाते? क्या यह बताएंगे कि जिलों में प्रभारी मंत्री जब जाते हैं, तो कलेक्टर से लड़ना पड़ता है और कलेक्टर उनकी नहीं मानते? क्या यह बताएंगे कि बीजेपी प्रभारी क्यों नाराज हैं, प्रभारी क्यों नहीं आ रहे?


