मकर संक्रांति पर 23 साल बाद “षटतिला एकादशी’ का दुर्लभ संयोग, स्नान-दान से मिलेगा कई गुना पुण्य

इस बार मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का 23 साल बाद दुर्लभ संयोग बनेगा। इस दिन स्नान, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ेगा और सूर्य उपासना से सुख-समृद्धि मिलेगी। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति को सूर्य के राशि परिवर्तन और उत्तरायण के आरंभ का पर्व माना जाता है। 14 जनवरी को इस बार मकर संक्रांति पर भगवान विष्णु को समर्पित षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। मॉडल टाउन के पंडित राम अवतार का कहना है की इस विशेष योग में किया गया स्नान, दान और पूजा कई गुना पुण्य प्रदान करता है। क्योंकि मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी के साथ सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। जिसे देवताओं के दिन की शुरुआत कहा जाता है। इसी दिन षटतिला एकादशी होने से इसका आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक शक्तिशाली माना जा रहा है। शुभ मुहूर्त और पुण्य काल: पंडित राम अवतार के अनुसार, 14 जनवरी दोपहर 3:13 बजे सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा। पुण्य काल 3:13 बजे से 5:45 बजे तक और महापुण्य काल 3:13 बजे से 4:58 बजे तक रहेगा। इस दौरान स्नान, दान और पूजा करना अत्यंत लाभकारी है। इस दिन यह भूलकर भी मत करें: इस दिन मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखें। किसी से विवाद, झगड़ा या किसी से अपमानजनक व्यवहार न करें। मकर संक्रांति पर सूर्य देव और षटतिला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। सूर्योदय से पहले काले तिल और गंगाजल मिले जल से स्नान करें। तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। भगवान विष्णु को तिल से बने लड्डू या व्यंजन का भोग लगाएं। वहीं इस दिन दान का विशेष महत्व है। इस दिन खिचड़ी, काला तिल, गुड़, ऊनी कपड़े और कंबल का दान करना बेहद शुभ माना जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाता है। वहीं मकर संक्रांति के दिन पितरों का तर्पण करें। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कर सूर्य देव की आराधना करें। सात्विक और शुद्ध भोजन का सेवन करें।

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