भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग अब भी अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती हैं। अब यहां से एक नई और बेहद गंभीर बीमारी का मामला सामने आया है। भागीरथपुरा में रहने वाली पार्वती बाई को दूषित पानी पीने के बाद गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) नाम की बीमारी हो गई है। यह बीमारी शरीर की नसों पर असर डालती है और मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। पार्वती बाई के परिजन प्रदीप कोंडला के अनुसार, 27 दिसंबर की रात उन्हें उल्टी और दस्त शुरू हुए। 28 दिसंबर को उन्हें पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर 31 दिसंबर को आईसीयू में शिफ्ट किया गया। 1 जनवरी को जांच में पता चला कि उन्हें जीबीएस हो गया है। अभी पार्वती की हालत गंभीर है। सांसें वेंटिलेटर के सहारे चल रही हैं और किडनी की परेशानी के कारण डायलिसिस भी करना पड़ रहा है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अपूर्व पौरणिक और डॉ. वरुण कटारिया के मुताबिक जीबीएस एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक बीमारी है। यह अक्सर पेट के संक्रमण के बाद होती है और एक ही इलाके में कई लोगों को हो सकती है। उन्होंने बताया कि गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। करीब 70% मरीज ठीक हो जाते हैं, कुछ मरीजों में स्थायी कमजोरी रह जाती है। समय पर इलाज न मिले तो मौत का खतरा रहता है। भागीरथपुरा में 10 से 20 नए मरीज सामने आ सकते हैं। जीबीएस क्या है? जीबीएस एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपनी ही नसों पर हमला करने लगती है। इसमें हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन होता है। कमजोरी पैरों से शुरू होकर पूरे शरीर में फैल सकती है। चलने, बोलने और सांस लेने में दिक्कत आती है। लकवा हो सकता है। और मरीज को वेंटिलेटर पर रखना पड़ता है। 10% मरीजों की मौत भी हो सकती है। इलाज और खर्च… जीबीएस का इलाज महंगा है। इलाज में खास इंजेक्शन (आईवीआईजी) दिए जाते हैं, जिनकी कीमत 30 हजार रु. प्रति इंजेक्शन होती है। अक्सर 5 से 10 इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं। 1 मरीज के इलाज पर 15 लाख रुपए तक खर्च आ सकता है। 1 बच्चे को हैजा की पुष्टि, 20 मरीज आईसीयू में… इंदौर के भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त से 149 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें 20 गंभीर केस आईसीयू में हैं। चाचा नेहरू अस्पताल में एक बच्चे में हैजा की पुष्टि हुई। दूषित पानी में ई‑कोलाई और शिगेला पाए गए।


