ऑनलाइन गेमिंग से कर्ज में डूबा गार्ड:बेटी के सामने खुद को चाकू मारा फिर जहर खाया, मौत

ऑनलाइन गेमिंग की लत से कर्ज में डूबे एक सिक्योरिटी गार्ड ने आत्महत्या कर ली। गांधी नगर क्षेत्र के अर्जुन (35) पिता शिवनारायण सोलंकी ने शुक्रवार को बेटी के सामने खुद को चाकू से घायल किया और फिर जहर खा लिया। बेटी की चीख सुनकर पड़ोसी पहुंचे। वे तुरंत हॉस्पिटल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित बताया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि अर्जुन को गेमिंग की लत थी। इसी कारण वह कर्ज में डूब गया था। कर्जदार उसे लगातार परेशान कर रहे थे, जिसके कारण उसने यह कदम उठाया। पुलिस के मुताबिक शुक्रवार को जब अर्जुन की पत्नी घर पर नहीं थी तब उसने 8 साल की बेटी और 3 साल के बेटे को पैसे देकर बाहर भेज दिया। जैसे ही दोनों बाहर गए तो अर्जुन ने दरवाजा बंद कर लिया। बेटी को शक हुआ तो उसने खिड़की से झांककर देखा। तब अर्जुन ने पहले चाकू से गले पर वार किया, फिर हाथ की नस काटी। इसके बाद जहर खा लिया। पिता को गंभीर हालत में देखकर घबरा गई और चिल्लाने लगी और पड़ोसियों को बुलाया। 10 लाख घर वालों ने पहले भी चुकाए थे भाई महेश ने बताया कि अर्जुन ऑनलाइन गेमिंग में बहुत रुपए हार चुका था। कर्ज चुकाने के लिए उसने कई लोगों से उधार भी लिया था। वे उसे लगातार परेशान कर रहे थे। दो महीने पहले अर्जुन ने सुसाइड की कोशिश की थी तब उसे बचा लिया गया था। अर्जुन ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें कर्जदारों का जिक्र है। परिजन ने बताया कि अर्जुन पहले आलोट में रिक्शा चलाता था, जहां उसने 10 लाख रुपए का कर्ज लिया था। यह कर्ज परिवार ने चुका दिया। इसके बाद वह इंदौर आकर सिक्योरिटी गार्ड का काम करने लगा, लेकिन यहां भी उसने 4-5 लाख रुपए का कर्ज ले लिया। फ्री फायर गेम की लत में 11वीं का छात्र ट्रेन से कटा छोला मंदिर इलाके में रहने वाले 11वीं के छात्र ने ऑनलाइन गेम की लत से परेशान होकर शुक्रवार देर रात ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली। घटना के वक्त मृत्युंजय शर्मा (16 वर्ष) घर पर अकेला था। मां और बहन विदिशा गई थीं। पिता ऑटो चालक हैं। उसके मामा मनोज शर्मा ने बताया कि भांजा अधिकांश समय मोबाइल में व्यस्त रहता था। उसे फ्री फायर गेम खेलने की लत थी। ऑनलाइन गेम खेलने की वजह से मां-पिता उसे समझाया करते थे, लेकिन उसने किसी की बात नहीं मानी। थाना प्रभारी सुरेश नागर ने बताया कि मृत्युंजय की मौत की हर एंगल से जांच हो रही है। छात्र के मोबाइल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि गेमिंग की लत ने उसकी मानसिक स्थिति पर क्या असर डाला।

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