भिंड में अपनी लंबित सात सूत्रीय मांगों को लेकर अतिथि शिक्षकों ने भिंड में जोरदार प्रदर्शन किया। आजाद शिक्षक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक उत्तरी मैदान में एकत्रित हुए और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने तहसीलदार मोहनलाल शर्मा और भिंड विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह को ज्ञापन सौंपकर कार्यानुभव और वरिष्ठता के आधार पर भविष्य सुरक्षित करने की मांग रखी। 17–18 साल की सेवा, फिर भी नहीं मिला स्थायित्व
प्रदर्शन कर रहे अतिथि शिक्षकों ने बताया कि वे पिछले 17–18 वर्षों से स्कूल शिक्षा विभाग और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के अंतर्गत शासकीय विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायित्व नहीं मिला। शिक्षकों का कहना है कि हाल ही में सरकार द्वारा कर्मचारियों के लिए अलग-अलग कैडर तय किए गए, लेकिन अतिथि शिक्षकों को इसमें शामिल नहीं किया गया, जिससे उनका भविष्य और अधिक असुरक्षित हो गया है। 12 माह सेवा और 62 वर्ष तक सुरक्षा की मांग
ज्ञापन के माध्यम से अतिथि शिक्षकों ने कार्यानुभव और वरिष्ठता के आधार पर 12 माह की सेवा तथा 62 वर्ष तक भविष्य सुरक्षित करने की मांग की। इसके साथ ही सेवा से पृथक किए गए अतिथि शिक्षकों को रिक्त पदों पर समायोजित करने, शिक्षक भर्ती में अनुभव के आधार पर बोनस अंक जोड़ने और विभागीय परीक्षा आयोजित कर स्थायी समाधान निकालने की मांग भी रखी गई। अन्य राज्यों का मॉडल लागू करने की मांग
अतिथि शिक्षकों ने हरियाणा मॉडल अतिथि शिक्षक विधेयक 2019 और छत्तीसगढ़ मॉडल लागू करने की मांग करते हुए कहा कि अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश में भी अतिथि शिक्षकों को सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य दिया जाना चाहिए। सात सूत्रीय प्रमुख मांगें यह शिक्षक रहे मौजूद
प्रदर्शन में राजेश सिंह, मीना, धर्मेंद्र नखरिया, राजपाल कुशवाह, अनिल दिवाकर, संजीव पाराशर, ध्रुव यादव, अनुज यादव, अरुण सैनी, सुनील शर्मा, उदय सिंह, सतीष सरदार, अर्चना दुबे, संध्या, संगीता मिश्रा, आशुतोष खरे, सूरतराम, मुकेश राठौर सहित बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक शामिल रहे।


