सरकार के संजीवनी क्लिनिक खुद ‘वेंटिलेटर’ पर हैं। शहर में 85 संजीवनी क्लिनिक बनाने के लिए 20 करोड़ से अधिक राशि केंद्र सरकार ने दी। इनमें से 34 संजीवनी क्लिनिक बनाकर निगम प्रशासन स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर चुका है। इनमें से सिर्फ 8 में ही एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती है। बाकी खाली हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के लिए इन क्लिनिक को संचालित करना चुनौती बन गया है। विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन क्लिनिक के लिए स्टाफ की तैनाती करना है। दरअसल, बतौर वेतन सिर्फ 33 हजार रुपए दिए जाते हैं। बाकी प्रति मरीज इंसेंटिव का प्रावधान है। लाखों, करोड़ों रुपया खर्च कर डिग्री हासिल करने वाले डॉक्टर्स मात्र 33 हजार रुपए में सुबह 9 से शाम 5 बजे तक एक डिस्पेंसरी में क्यों आएंगे? इतने कम वेतन के कारण कोई डॉक्टर सरकारी सेवा में नहीं आना चाह रहा।
उधर, निजी हाथों में देने के निर्णय का विरोध भी
शासकीय स्वशासी चिकित्सक महासंघ के संयोजक डॉ. माधव हसानी ने कहा कि हाल ही में जिला अस्पतालों के बारे में भी ऐसा निर्णय हुआ था। जिस पर शासन ने चीजों को समझकर निर्णय लिया और उसको स्थगित किया। जहां तक संजीवनी की बात है तो शासकीय भूमि पर स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से मिली राशि से यह भवन बने हैं। निगम निर्माण एजेंसी है। शासन से शीघ्र ही पदस्थापना की जाना है। इनका निजीकरण नहीं होना चाहिए। फिलहाल 16 क्लिनिक देने की तैयारी विभाग ने इन क्लिनिक को संचालित करने के लिए अब दूसरा रास्ता निकाला है। इन्हें निजी संस्थाओं को गोद दिया जाएगा। पिछले दिनों महापौर पुष्यमित्र भार्गव की पहल पर 5 क्लिनिक को निजी संस्थाओं को संचालित करने के लिए दिया गया है। स्टाफ की व्यवस्था यही संस्थाएं करेंगी। बकायदा शासन से इसकी मंजूरी भी मिली। इसी मंजूरी को आधार मानते हुए पिछले दिनों एक बैठक में जिला प्रशासन ने संस्थाओं के सामने अन्य डिस्पेंसरी व संजीवनी क्लिनिक भी गोद लेने के प्रस्ताव रखा। इंडेक्स मेडिकल कॉलेज ने 11 संजीवनी चलाने की इच्छा जाहिर की। वहीं अरबिंदो मेडिकल कॉलेज ने भी 5 संजीवनी की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी लेने पर सहमति दी। उद्देश्य था- लोगों को समय पर प्राथमिक उपचार मिल सके लोगों को प्राथमिक उपचार समय पर मिले, इस उद्देश्य के साथ पूरे प्रदेश में संजीवनी क्लिनिक खोलने की योजना सरकार लेकर आई। नगरीय क्षेत्रों में इस तरह के क्लिनिक की स्थापना गरीब बस्तियों और मोहल्लों में की जाएगी। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों के साथ इन क्लिनिक को जोड़ा जाएगा, जहां पर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की तुलना में बेहतर उपचार की सुविधा मिल सके। एक बार प्राथमिक उपचार मिलने के बाद अगर ऑपरेशन की जरूरत है या गंभीर रोगी हैं तो फिर उन्हें अस्पतालों में शिफ्ट किया जाएगा और आयुष्मान योजना के तहत उनका महंगा ऑपरेशन या इलाज भी कराया जाएगा। शासन को पत्र लिखेंगे, वहां से मंजूरी के बाद ही फैसला लेंगे
सिर्फ 5 संजीवनी क्लिनिक की मंजूरी शासन से मिली थी। इसके अलावा किसी को संजीवनी क्लिनिक नहीं दिया गया है। इंडेक्स कॉलेज व अन्य ने और क्लिनिक के संचालन की इच्छा जताई है। इसके लिए शासन को पत्र लिखेंगे। वहां से मंजूरी के बाद ही दिया जाएगा।- डॉ. बीएस सैत्या, सीएमएचओ


