जिफ के तीसरे दिन हुई 61 फिल्मों की स्क्रीनिंग:देवयानी बोलीं- 30 साल में फेस्टिवल नहीं पहुंची, पहली बार डायरेक्शन किया और अवॉर्ड मिला

जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (जिफ) के तीसरे दिन सिनेमा प्रेमियों को 61 शानदार फिल्मों की स्क्रीनिंग का अद्भुत अनुभव मिला। इनमें 16 फीचर फिक्शन, 34 शॉर्ट फिक्शन और एक प्रभावशाली डॉक्यूमेंट्री फीचर शामिल थी। जयपुर के आईनॉक्स सिनेमाज, जीटी सेंट्रल में आयोजित यह उत्सव सिनेमा के कल, वर्तमान और भविष्य पर गहन चर्चा का केंद्र बना। दूसरे दिन की शुरुआत “फिल्म निर्माण में एआई” पर चर्चा के साथ हुई, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव को समझने और इसका सिनेमा में उपयोग करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इसी क्रम में, “थिएटर से परे: ओटीटी और स्ट्रीमिंग” सत्र ने डिजिटल युग में बदलते दर्शकों और वितरण रणनीतियों पर प्रकाश डाला। द कलर्स ऑफ राजस्थान सत्र में जानेमाने संगीत निर्माता के.सी. मालू, फिल्मकार गजेंद्र श्रोत्रिय और अभिनेता श्रवण सागर ने राजस्थानी सिनेमा की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर विचार रखे। उन्होंने क्षेत्रीय सिनेमा को विकसित करने के लिए सांस्कृतिक समझ और रणनीतिक मार्केटिंग की आवश्यकता पर जोर दिया। जिफ में भारतीय अभिनेत्री देवयानी बेतारबेट ने अपने तीन दशकों के करियर और निर्देशन की पहली फिल्म “हैंडकरचीफ क्वीन” पर चर्चा की। उन्होंने भारतीय सिनेमा में बदलाव और डिजिटल तकनीक के बढ़ते महत्व पर अपनी अंतर्दृष्टि साझा की। देवयानी ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने फिल्म निर्माण को सहज बनाया है, लेकिन समर्पण और समयबद्धता का महत्व अभी भी उतना ही है। उनके निर्देशन की शुरुआत उनकी बचपन की यादों से प्रेरित है और इसे इल्याराजा और बी. लेनिन जैसे दिग्गजों का साथ मिला है। उन्होंने कहा कि मैंने 30 साल साउथ में काफी काम किया है, हर तरह की फिल्में की हैं, लेकिन कभी फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा नहीं बनी। पहली बार शॉर्ट फिल्म बनाई और यह जिफ में सलेक्ट हो गई है और अब इसे यहां बेस्ट चिल्ड्रन फिल्म फेस्टिवल का अवॉर्ड भी मिल चुका है। उन्होंने कहा कि मेरी मां ने मुझे बहुत सपोर्ट किया है अगर वह नहीं होती तो मैं आज यहां पर बैठकर बात नहीं कर पाती। मेरी सक्सेस में सबसे बड़ा जो हाथ है वह मेरी मां का ही है। मेरी जनरेशन में फिल्म थोड़ी अलग टाइप की होती थी और उसमें पंक्चुअलिटी डेडीकेशन और सिंसेरिटी ज्यादा होती थी। आज के टाइम पर थोड़ा रिलैक्स वर्क हो गया है जो चीजों को आसान कर देता है। तीसरे दिन एंड्रयू वियाल का मास्टरक्लास, नीचा नगर और सलाम बॉम्बे की विशेष स्क्रीनिंग और विश्व सिनेमा एवं महिला फिल्मकार विषयों पर पैनल चर्चा प्रमुख आकर्षण रहेंगे। फिल्म रूबरू ने लोगों का ध्यान खींचा।

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