कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का उत्तर भारत से आने वाली ट्रेनों और विमानों पर असर…
कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने झारखंड की राजधानी रांची समेत पूरे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। खासकर उत्तर भारत से आने वाली ट्रेनों और विमानों पर ठंड का सीधा असर देखने को मिल रहा है, जिससे यात्रियों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। बीते करीब 15 दिनों से कोहरे और धुंध के कारण कई ट्रेनें अपने तय समय से घंटों देरी से चल रही हैं, जिससे यात्रियों को स्टेशन पर लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं हवाई यातायात भी इस मौसम की मार से अछूता नहीं है। पिछले पंद्रह दिनों में औसतन प्रतिदिन तीन विमानों को रद्द करना पड़ा है। जबकि सौ से अधिक उड़ानें एक घंटे से लेकर पांच घंटे तक की देरी से संचालित हुई हैं। ट्रेन यात्रियों के लिए ठंड एक और बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। खास तौर पर स्लीपर और जनरल बोगी में यात्रा कर रहे यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बोगी में कहीं भी खिड़की का हल्का सा खुला रह जाना पूरी बोगी में ठंडी हवा फैला देता है, जिससे यात्री ठिठुरने को मजबूर हैं। भीषण ठंड को देखते हुए अब यात्री स्लीपर कोच में भी बेड रोल और कंबल की मांग करने लगे हैं, ताकि सफर कुछ हद तक आरामदायक हो सके। सावधान! कोहरे में ऐसे ट्रैक पार करना हो सकता है खतरनाक
15 दिनों में कोहरे के कारण ये ट्रेनें लेट आईं, स्वर्ण जयंती एक्स. 26 फरवरी तक रद्द
1. ट्रेन नंबर 18310 संबलपुर- जम्मूतवी एक्सप्रेस एक घंटे से 10 घंटे तक देरी से रांची रेलवे स्टेशन पहुंची है।
2. ट्रेन नंबर 20840 राजधानी एक्सप्रेस नई दिल्ली से रांची 15 दिनों में औसतन दो से तीन घंटे देरी से रांची स्टेशन पहुंच रही है।
3. जम्मू तवी पिछले 15 दिन में औसतन तीन घंटे तक देरी से आई है। रविवार को डेढ़ घंटा लेट से आई है।
4. ट्रेन नंबर 17007 चर्लपल्ली एक्सप्रेस ट्रेन भी पिछले 15 दिनों में औसतन ढाई से तीन घंटे तक लेट से रांची पहुंची है।
5. नई दिल्ली से आने व जाने वाली ट्रेन नंबर 12873/12874 स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस कोहरे के कारण 26 फरवरी तक रद्द है। स्लीपर में भी बेड-रोल मिले : पैसेंजर एसोसिएशन
झारखंड पैसेंजर्स एसोसिएशन के सचिव प्रेम कटारूका ने कहा कि ठंड के दिनों में स्लीपर कोच में बेडरोल उपलब्ध कराए जाएं और एसी‑3 की तरह पर्दे लगाए जाएं। स्लीपर बोगी में बूढ़े और बच्चों को इस भीषण ठंड में काफी परेशानी हो रही है और रेल प्रशासन को तुरंत राहत के उपाय करने चाहिए। देवघर से रांची आने वाली यात्री श्वेता कुमारी और समीक्षा ने कहा कि स्लीपर बोगी में सिर्फ एक खिड़की खुली रह जाने से अंदर का तापमान काफी ठंडा हो गया था। हमारे चेहरे फूल गए। लंबी दूरी की ट्रेनों में फॉग सेफ डिवाइस लगाना ही विकल्प
फॉग सेफ डिवाइस सबसे आधुनिक उपकरण है, जो लोको पायलट के केबिन में एक टैबलेट जैसा डिस्प्ले होता है। यह जीपीएस पर आधारित होता है। कोहरे में सिग्नल देखने में मुश्किल होने पर यह दूरी और सिग्नल के रंग की जानकारी देता है, जिससे दुर्घटना की आशंका कम होती है। सुबह 4 से 6 घंटे की देरी से उड़ रहे विमान, यात्री परेशान
कोहरे के कारण पिछले 15 दिन में 100 से ज्यादा फ्लाइट घंटों देरी से रवाना हुए। रोज औसतन तीन विमान रद्द रहे हैं। रविवार को एक विमान रद्द रहा और दो डायवर्ट किए गए। सुबह 7.30 बजे कोलकाता जाने वाला इंडिगो का विमान 6 घंटे देरी से दोपहर डेढ़ बजे उड़ा। सुबह नौ बजे बेंगलुरू जाने वाला विमान पौने एक बजे उड़ा। यात्रियों की सुविधाओं का रखा जा रहा ध्यान
ठंड के मौसम में रेल यात्रियों की सुविधा का खास ध्यान रखा जा रहा है। ट्रेन आने पर सभी बोगियों की खिड़कियां बंद कर दी जाती हैं, ताकि ठंडी हवा अंदर न प्रवेश कर सके। प्रतिदिन बोगियों की जांच और ट्रेन की सभी सुविधाओं की सिस्टमेटिक चेकिंग की जाती है। यह कदम यात्रियों को कड़ाके की ठंड और परेशानी से बचाने के लिए उठाया गया है। – करुणानिधि सिंह, डीआरएम, रांची


