भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़ सपनों की राह आसान नहीं होती, लेकिन जब इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास साथ हों तो जिम्मेदारियां भी रास्ता बना देती हैं। समीपस्थ गांव गोपालनगर निवासी 29 वर्षीय राहुल दायमा की कहानी इसी जज्बे की मिसाल है। वर्तमान में राजस्थान रोडवेज में कंडक्टर के रूप में कार्यरत राहुल का सपना हमेशा से फिल्म मेकर बनने का रहा है। इसी सपने को साकार करने की दिशा में वे अपनी पहली शॉर्ट फिल्म ‘भरोसे का सफर’ पर काम कर रहे हैं। चित्तौड़गढ़ शहर में स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई के दौरान 2018 से ही राहुल में फिल्म और अभिनय का जुनून था, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के चलते वे प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं ले सके। पिता रोडवेज में ड्राइवर थे, जिन्होंने बेटे की रुचि को समझते हुए उसे वीडियो एडिटिंग सीखने के लिए प्रेरित किया। राहुल ने मोबाइल कैमरे से छोटे-छोटे वीडियो बनाना शुरू किया। 2020 में पिता का निधन हो गया। राहुल को अनुकंपा नियुक्ति में रोडवेज कंडक्टर की नौकरी मिली। जिम्मेदारियों के बोझ तले उन्होंने कुछ समय के लिए अपने सपनों को रोक दिया। एक दिन मोबाइल पर सुपरस्टार रजनीकांत का वीडियो देखा, जिसमें बताया गया था कि वे भी कभी बस कंडक्टर रहे थे। यहीं से राहुल को नई प्रेरणा मिली। अब उनकी दिनचर्या सुबह चार बजे शूटिंग, ड्यूटी के बाद देर रात तक एडिटिंग की है। बस यात्रियों के हाव-भाव से अभिनय की बारीकियां सीखते हुए उन्होंने रोडवेज के अनुभवों पर आधारित कहानी लिखी। बिना बजट, प्रोड्यूसर या टीम के राहुल स्वयं स्क्रिप्ट, निर्देशन, प्रोडक्शन और एडिटिंग कर रहे हैं। ‘भरोसे का सफर’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि संघर्ष, सपनों और आत्मविश्वास की कहानी है। राहुल दायमा ने बताया यह फिल्म 12 से 15 मिनट की होगी। रिलीज से पहले रोडवेज मुख्यालय से भी अनुमति लेंेगे। इसी महीने ट्रेलर लांच करेंगे और फरवरी में रिलीज करेंगे। जो उनके यू ट्यूब चैनल राहुल दायमा ऑफिशियल पर देखी जा सकेगी। भविष्य में भी सच्ची घटनाओं और समाज के अनदेखे पहलुओं पर आधारित फिल्में बनाने का प्रयास करेंगे, ताकि लोगों को प्रेरणा मिले और सकारात्मक संदेश पहुंचे। रिलीज से पूर्व रोडवेज मुख्यालय से अनुमति लेंगे


