शाहपुरा का मोर वन उजड़ने के कगार पर है। दो हिस्सों में 70 एकड़ में फैले इस मोर वन में चंदन और दूसरे पेड़ों की चोरी हो रही है, और उनकी जगह पर झुग्गियां उग रही हैं। मोर ऐसा पक्षी है जो एकांत पसंद करता है। झुग्गियों के बढ़ने से यहां लोगों की आवाजाही बढ़ रही है, हरियाली कम हो रही है, नतीजा राष्ट्रीय पक्षी मोर यहां से गायब होते जा रहे हैं। त्रिलंगा, शाहपुरा और भरत नगर में रहने वाले लोग बताते हैं कि आज से दस साल पहले तक यहां जितने मोर थे, लगता है अब उसके आधे भी नहीं बचे होंगे। मोर की आवाज आना कम होती जा रही है। पहाड़ी पर चंदन और दूसरे पेड़ थे, लेकिन धीरे-धीरे कटते जा रहे हैं। पेड़ काट कर पहाड़ी को समतल करके झुग्गी बनाई जा रही है। शाहपुरा सी सेक्टर की तरफ दो नई सड़कें बन जाने के बाद झुग्गियां बनाने का सिलसिला और तेज हो गया है। इन झुग्गियों तक आने-जाने के लिए पगडंडी भी बनाई जा रही है। स्थानीय रहवासियों के अनुसार प्रशासन को शिकायत करने के बावजूद झुग्गियां बनने और पेड़ कटाई पर रोक नहीं लग सकी है। दो हिस्सों में बंटा मोर वन, दोनों हिस्सों में हालत बदतर एसडीओ ने माना- 5 एकड़ में कब्जे, मौके पर इससे अधिक
वन विभाग के एसडीओ आरके चौधरी ने बताया कि दो हिस्सों में मोर वन 70 एकड़ में फैला है। इसके लिए 4000 रनिंग मीटर फैंसिंग की जरूरत है, इसमें से 2250 मीटर फैंसिंग हुई है। इसलिए अतिक्रमण हो रहा है। हालांकि वे केवल 5 एकड़ में अतिक्रमण की बात स्वीकार करते हैं, लेकिन मौके पर यह अधिक है।


