रिम्स में जल्द शुरू होगा किडनी ट्रांसप्लांट, नौ को होगा फैसला

रांची के राज अस्पताल को भी मिल सकती है अनुमति झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में जल्दी ही किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होगी। करीब पांच साल से अटकी यह प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचने वाली है। स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी कमेटी की नौ जनवरी को एक अहम बैठक होने वाली है। इसमें रिम्स के साथ ही रांची के राज अस्पताल को भी किडनी ट्रांसप्लांट के लिए रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस देने पर विचार किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में इन दोनों अस्पतालों को किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति देने पर चर्चा होगी। स्वास्थ्य विभाग भविष्य में इन अस्पतालों के अलावा अन्य सरकारी अस्पतालों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है। रिम्स ने 2020 में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने का प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग को भेजा था वहां से इसे केंद्र सरकार को भेजी गई थी। जुलाई 2021 में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए को-ऑर्डिनेटर की नियुक्ति का इंटरव्यू भी कराया गया। लेकिन 2022 में कुछ तकनीकी और संरचनात्मक कमियों का हवाला देते हुए फाइल लौटा दी गई। रिम्स को फिर प्रस्ताव देने को कहा। इसी बीच अगस्त 2023 में रिम्स को ब्रेन डेड घोषित करने की अनुमति मिली। इसे ट्रांसप्लांट की दिशा में अहम पड़ाव माना गया। फिर सितंबर 2023 में रिम्स ने संशोधित प्रस्ताव भेजा। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए यह है प्रक्रिया… सबसे पहले निदेशक-प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं की अध्यक्षता में तकनीकी समिति का गठन किया जाता है। यह समिति संबंधित अस्पताल का स्थल निरीक्षण करती है। निरीक्षण के दौरान बुनियादी ढांचे, विशेषज्ञ फैकल्टी, नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग, ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, ब्लड बैंक, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन सिस्टम समेत सभी आवश्यक संसाधनों का गहन मूल्यांकन किया जाता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर एडवाइजरी कमेटी तय करती है कि संबंधित अस्पताल सभी मानकों और अर्हताओं को पूरा करता है या नहीं। फिर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक में अंतिम फैसला होता है। राज्य में अभी कहां है ट्रांसप्लांट की व्यवस्था? -राज्य में अभी सिर्फ एक निजी अस्पताल में यह सुविधा है। अधिकतर मरीज इसके लिए दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े अस्पतालों पर निर्भर हैं। इससे मरीजों को आ​​र्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है। सरकारी अस्पताल में यह सेवा शुरू होने से खासकर गरीब मरीजों को काफी राहत मिलेगी। रिम्स में ट्रांसप्लांट शुरू होने पर कितना खर्च आएगा? – निजी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट पर अमूमन 10 से 20 लाख रुपए का खर्च आता है। रिम्स में यह सुविधा शुरू होने से ऑर्गन मिलने के बाद ट्रांसप्लांट नि:शुल्क हो सकेगा। लोगों को इसके लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना होगा। झारखंड में किडनी रोग के कितने मरीज हैं? – स्वास्थ्य विभाग के पास ऐसा कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है। लेकिन एक्सपर्ट डॉक्टरों के मुताबिक विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने वाले 100 में से 5 मरीज किडनी रोग के मिलते हैं। रिम्स इसके लिए कितना तैयार है? यहां कितने एक्सपर्ट हैं? – रिम्स किडनी ट्रांसप्लांट के लिए करीब तीन साल से तैयार है। यहां नेफ्रोलॉजी के एक्सपर्ट के अलावा यूरोलॉजी के भी डॉक्टर हैं। सुपर स्पेशियलिटी विंग है, जहां एक्सपर्ट एनेस्थेटिस्ट भी तैनात हैं। अनुमति मिलने के बाद सेवा शुरू होने में कितना समय लगेगा? – एडवाइजरी कमेटी की नौ जनवरी को होने वाली बैठक में अगर अनुमति मिल जाती है तो अधिकतम छह महीने में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू हो जाएगा।

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