SP ओसवाल से 7 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला:ED के बाद अब लुधियाना पुलिस लेगी आरोपियों का प्रोडक्शन रिमांड,प्रक्रिया शुरू

पंजाब के लुधियाना में पद्म भूषण से सम्मानित और वर्धमान ग्रुप के 82 वर्षीय चेयरमेन, एस.पी. ओसवाल से जुड़े 7 करोड़ रुपए के साइबर धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के प्रवेश ने लुधियाना साइबर सेल पुलिस स्टेशन के लिए जांच के नया दरवाजे खोल दिए हैं। ED की कार्रवाई के बाद, शहर की पुलिस ने दो आरोपियों-असम के अर्पित राठौर और रूमी कलिता को हिरासत लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन आरोपियों को हाल ही में ED ने गिरफ्तार किया है। लुधियाना पुलिस साइबर धोखाधड़ी मामले के संबंध में विस्तृत पूछताछ के लिए उन्हें प्रोडक्शन वारंट पर लाएगी। रूमी कलिता को पहले से ही लुधियाना पुलिस द्वारा वांछित किया गया था। दोनों आरोपियों का साइबर पुलिस लेगी प्रोडक्शन वारंट एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि हालांकि अर्पित राठौर को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की वांछित आरोपियों की सूची में पहले नामित नहीं किया गया था। रूमी कलिता पहले से ही मामले में स्कैनर (शक) के अधीन थी। उन्होंने कहा कि ED ने धोखाधड़ी के साथ कथित संबंधों के लिए दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, इसलिए उन्हें पूछताछ के लिए प्रोडक्शन वारंट पर लाया जाएगा। PMLA के तहत हुई गिरफ्तारियां अधिकारी ने स्पष्ट किया कि साइबर धोखाधड़ी की जांच लुधियाना पुलिस के पास है, जबकि ED ने स्वत: संज्ञान लिया है और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तारियां की हैं। उन्होंने कहा कि ED के निष्कर्षों से पुलिस को अपनी जांच मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। लुधियाना पुलिस ने पहले मई 2025 में गुवाहाटी के अतनु चौधरी को गिरफ्तार किया था। चौधरी को आनंद कुमार के साथ पहली बार साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने सितंबर 2024 में गिरफ्तार किया था, लेकिन जांच में शामिल होने के निर्देशों के साथ जल्द ही जमानत पर रिहा कर दिया गया। हालांकि, वह पुलिस के सामने पेश नहीं हुआ। जांच के दौरान आरोपियों के कई सहयोगियों की पहचान की गई, जिनमें निम्मी भट्टाचार्जी, आलोक रांगी, गुलाम मोर्तजा, संजय सूत्रधार, रिंटू, रूमी कलिता और जाकिर शामिल हैं। इनमें से रूमी कलिता को अब ED ने गिरफ्तार कर लिया है। 31 अगस्त 2024 को हुई थी FIR दर्ज
लुधियाना साइबर अपराध पुलिस स्टेशन ने 31 अगस्त, 2024 को एक FIR दर्ज की थी, जब ओसवाल को कथित तौर पर 7 करोड़ रुपए की ठगी का शिकार बनाया गया था। पुलिस के अनुसार, धोखेबाजों ने बुजुर्ग उद्योगपति को लगातार निगरानी में रखा, उन्हें अपना स्काइप कैमरा चालू रखने और अपराध करते समय किसी को भी कॉल या संदेश नहीं भेजने का निर्देश दिया।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *