संस्कारधानी के मानस भवन में आयोजित चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस श्रद्धा, संस्कृति और वैचारिक विमर्श के साथ संपन्न हुआ। समापन सत्र में बिहार के राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने कहा कि भारत की पहचान किसी भेदभाव से नहीं, बल्कि आत्मा, चेतना और विवेक से है। परमात्मा प्रत्येक हृदय में निवास करता है, इसलिए हर शरीर मंदिर है। भारत का धर्म आध्यात्मिकता है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम किसी एक समुदाय के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के आदर्श हैं। रामायण समाज को जोड़ने वाला ग्रंथ है, विभाजन करने वाला नहीं। भारतीय दर्शन में भक्ति, ज्ञान और कर्म का संतुलन है, जिसका सार राम, कृष्ण और कपिल मुनि के उपदेशों में मिलता है। संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह ने रामायण को जीवन की आधारशिला बताया। शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने श्रीराम के चरित्र को नई पीढ़ी के लिए श्रेष्ठ आचरण प्रतिमान कहा। ज्ञानेश्वरी दीदी ने युवाओं को “रामादिवत् समाचरेत, न रावणादिवत्” का संदेश दिया। सम्मेलन में इंडो-थाई रामायण फोरम, शोध सत्र, श्री रामवल्लभ ग्रंथ विमोचन, कवि सम्मेलन और रामलीला की प्रस्तुति भी हुई। राज्यपाल का संदेश : राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने कहा कि आज विश्व में अशांति और युद्ध मानव अस्तित्व की होड़ का परिणाम हैं, जबकि भारतीय संस्कृति सदैव शांति का संदेश देती रही है।


