रालामंडल अभयारण्य को सुरक्षित रखने और उसके आसपास बढ़ते शहरी दबाव को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मप्र पर्यटन बोर्ड ने रालामंडल के ईको-सेंसिटिव जोन के लिए जोनल मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रालामंडल शहर के लिए ग्रीन लंग्स की तरह है। 247 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह इलाका शहर की सीमा से सटा इकलौता बड़ा हरित क्षेत्र है, जहां 3-4 तेंदुए, 300 से ज्यादा चीतल, नीलगाय, कृष्णमृग, 500 से अधिक मोर और हजारों सांप पाए जाते हैं। यह जोनल मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी मेहता एंड एसोसिएट्स को सौंपी गई है। ये है जोनल मास्टर प्लान तेजी विकास बना संकट
दरअसल, अभयारण्य के ठीक सामने से बायपास गुजरता है, जिसके दोनों ओर तेजी से शहरी विकास हो रहा है। बढ़ता ट्रैफिक, अवैध निर्माण और शहर का फैलाव अब इस जैव विविधता पर सीधा दबाव बना रहा है। अभयारण्य के आसपास बढ़ते मानव–वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए यह आवश्यक हो गया था। क्यों जरूरी है रालामंडल का ईको-सेंसिटिव जोन
डीएफओ प्रदीप मिश्रा का कहना है कि यह जोनल मास्टर प्लान सिर्फ रोक-टोक का दस्तावेज नहीं, बल्कि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की रूपरेखा है। यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुसार बनेगा।


