संस्कारों की बेला:गायत्री शक्ति पीठ पर तीन साल से बर्थडे यज्ञ की परंपरा, ताकि पर्यावरण शुद्ध हो और जीवन में आए शुद्धता

गायत्री परिवार शक्ति पीठ किला में प्रतिदिन बर्थडे यज्ञ का आयोजन किया जाता है, जिसमें कोई भी व्यक्ति अपने जन्मदिन पर निःशुल्क यज्ञ करा सकता है। यहां बनी यज्ञशाला में पिछले तीन साल से बर्थडे यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। एक दिन में एक से 11 लोगों तक का जन्मदिन यज्ञ होता है, जिसमें शक्ति पीठ द्वारा ही समिधा, साकल्य, गाय का घी और दीपक की व्यवस्था की जाती है। इसकी थीम पर्यावरण शुद्धता और सद्विचार है। इसलिए यज्ञ सामग्री में 15 प्रकार की औषधियों का उपयोग किया जाता है, जिनमें नागरमोथा, मैथा, चीड़, पलाश के फूल, बेल का छिलका, अगर-तगर, गुग्गुल, धोंस, कमल गट्टा, तिल, जौ, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, गिलोय, अर्जुन की छाल, नागमोथा, जटामांसी, कपूर कचरी, हल्दी और गुलाब की पंखुड़ियों के सम्मिश्रण से शामिल साकल्य का उपयोग होता है। इस सामग्री को गायत्री शक्ति पीठ मथुरा अथवा हरिद्वार से मंगाया जाता है। गाय का शुद्ध घी जड़खोर गोशाला, जोधपुर अथवा मथुरा से आता है। पीपल की समिधा का इस्तेमाल होता है। गायत्री शक्ति पीठ के मुख्य ट्रस्टी देवेंद्र चामड़ ने बताया कि बर्थडे यज्ञ से नई पीढ़ी संस्कारवान और सनातन परंपराओं से परिचित होती है। इससे सकारात्मकता आती है। औषधियों से वातावरण शुद्ध होता है। हवन सामग्री में जड़ी-बूटियों का उपयोग किए जाने से पर्यावरण में मौजूद कीटाणु नष्ट होते हैं और वातावरण शुद्ध होता है। स्वास्थ्य लाभ होता है। जन्मदिवस यज्ञ में शामिल होने वालों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। इस मौके पर सत्संग, संकीर्तन, संस्कार आदि आयोजन भी होते हैं। यज्ञ, हवन, दीपदान, सत्संग, पुंसवन, सीमंतोन्नयन, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकरण, कर्णवेध, विद्यारंभ, उपनयन, वेदारंभ, केशांत संस्कार, समावर्तन, विवाह संस्कार आदि संस्कार भी कराए जाते हैं। यह पूरी तरह निःशुल्क होता है। यदि कोई विशेष आग्रह करता है तो वह राशि शक्ति पीठ मंदिर के नाम से रसीद काटकर दी जाती है। महिलाएं कर रही पुरोहित का कार्य पुरोहित जैसी जिम्मेदारी के कार्य में अब महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। शहर की करीब 100 महिलाएं पुरोहिताई यानी कर्मकांड करा रही हैं, जो गांवों, घरों और मंदिरों में जाकर निःशुल्क धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करा रही हैं। ये महिलाएं गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार से प्रशिक्षित और दीक्षित हैं। इनमें से ज्यादातर ने हरिद्वार में करीब एक महीने रहकर परिभाजक प्रशिक्षण लिया है, जिसमें उन्हें कर्मकांड और संस्कार कराने की विधि, पद्धति और मंत्र सिखाए गए हैं।

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