विदिशा जिले के गंजबासौदा में जेल प्रहरी की प्रताड़ना से तंग आकर अंकित दुबे ने आत्महत्या करने की कोशिश की। अंकित ने आरोप लगाया है कि प्रहरी रामबाबू के जरिए गंजबासौदा उपजेल में काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा सूदखोरी में लगाया जा रहा है। इस पर मनमाना ब्याज वसूला गया है। गल्ला व्यापारी अंकित दुबे ने बताया कि उपजेल में तैनात प्रहरी रामबाबू शर्मा ने जेलर समेत अन्य अधिकारियों के नाम पर काली कमाई का पैसा सूदखोरी में चलाने के लिए उसको दिया था। रामबाबू ने पहले उसे 2 लाख नकद दिए। बाद में ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, चेक और कैश के रूप में 64.33 लाख रुपए दिए। अंकित का दावा है कि उसने रामबाबू को 10 महीने में कुल 83.62 लाख रुपए लौटाए। ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए 33.49 लाख रुपए रामबाबू जबकि 3 लाख रुपए उसकी पत्नी के बैंक अकाउंट में भेजे। 45 लाख रुपए नकद दिए। इसके बावजूद रामबाबू ने कहा कि जो राशि लौटाई, वह तो ब्याज था। अब भी 50 लाख रुपए बकाया हैं। अंकित ने 30 नवंबर 2024 को आत्महत्या की कोशिश की। परिजन ने समय रहते अस्पताल पहुंचाया, जिससे जान बच गई। अंकित ने पुलिस स्टेशन, एसपी कार्यालय, लोकायुक्त और जेल मुख्यालय में शिकायत की लेकिन रामबाबू के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। इधर, मामला सामने आने के बाद जेल प्रहरी को सस्पेंड कर दिया गया है। ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से सामने आया काली कमाई से सूदखोरी का खेल
जेल की काली कमाई को सूदखोरी में लगाने के मामले का पूरा खेल अंकित दुबे, प्रहरी रामबाबू शर्मा और उसकी पत्नी के बैंक खातों में फोन पे के जरिए लेन-देन से पुख्ता होता है। रामबाबू और अंकित के बीच 13 मई 2024 से 16 नवंबर 2024 तक 575 बार लेन-देन हुआ। रामबाबू के एसबीआई और एचडीएफसी बैंक के खातों में 1 हजार रुपए से 90,000 रुपए दिए गए। इसी तरह रामबाबू की पत्नी के खातों में 30 मई 2024 से 26 सितंबर 2024 तक 73 से अधिक ट्रांजैक्शन हुए हैं। रामबाबू ने अलग-अलग नंबरों पर भी रुपए ट्रांसफर करवाए। प्रहरी ने कहा था- 10 से 11 लोगों को पैसा बांटना है, ऊपर से दबाव है
अंकित ने रामबाबू की रकम सूदखोरी के ‘डेली कलेक्शन’ के साथ अनाज के भंडारण में लगाई थी। जब रामबाबू ने 50 लाख रुपए और मांगे तो अंकित ने कलेक्शन का काम बंद करने और हिसाब करने को कहा। तब दोनों के बीच फोन पर हुई बातचीत में रामबाबू ने कहा कि यह अकेली उसकी रकम नहीं है। इसमें जेलर साहब का भी रुपया लगा है। एक चेक जो पोस्ट ऑफिस का दिया था, वो उन्हीं ने दिया था। रामबाबू ने कहा कि 10 से 11 लोगों को ये पैसा लौटाना है। इसकी वजह से उसके ऊपर भी दबाव है। जेल अधीक्षक बोले-उनका आपसी मामला, डीजी ने कहा- जांच करा रहे हैं
मामले में जेल प्रहरी रामबाबू शर्मा ने कहा, ‘अंकित ने जरूरत के लिए मुझसे रुपए लिए थे। मामला बासौदा थाने में विवेचना में है इसलिए कितने रुपए हैं, ये मैं नहीं बता सकता। इसमें जेलर साहब या किसी और का पैसा नहीं है। फोन पर हो सकता है कि मैंने बोल दिया हो ताकि ये पैसा दे दे।’ सहायक जेल अधीक्षक आलोक भार्गव ने कहा कि ये जेल प्रहरी और अंकित का आपसी मामला है। रामबाबू ने बताया कि मैंने अंकित को डराने के लिए जेलर का पैसा बताया। रामबाबू सेना से रिटायर है। उसके पास अच्छी खासी संपत्ति है, पर रुपए ब्याज पर देना सही नहीं है। वहीं, जेल डीजी जीपी सिंह बोले- जेल प्रहरी और व्यापारी के बीच लेन-देन का मामला संज्ञान में आया है। जांच करा रहे हैं। सरकारी कर्मचारी के भ्रष्टाचार से जुड़ी ये खबर भी पढे़ं… परिवहन विभाग के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा को फरार हुए पूरा एक महीना हो गया है। पिछले महीने 19 दिसंबर को ही लोकायुक्त ने भोपाल में अरेरा कॉलोनी स्थित उसके दो घरों पर छापा मारा था। सौरभ के मामले की जांच लोकायुक्त, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग (आईटी) जैसी जांच एजेंसियां कर रही हैं लेकिन 30 दिन बाद भी इनके हाथ खाली हैं। पढ़ें पूरी खबर…


