हनुमानगढ़ में नए साल की शुरुआत के साथ ही आशा सहयोगिनों ने अपने मानदेय और सुविधाओं को लेकर एक बार फिर आवाज उठाई है। सोमवार को जिले की आशा सहयोगिनों ने राजस्थान आशा सहयोगिनी चिकित्सा सेवा संघ के बैनर तले जिला कलेक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को आठ सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। संघ की जिलाध्यक्ष प्रमिला ने बताया कि आशा सहयोगिन स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं। वे घर-घर जाकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, सर्वे और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें उनके कार्यभार के अनुरूप मानदेय नहीं मिल रहा है, जिससे उनका आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है। उन्होंने मांग की कि आशा सहयोगिनों का न्यूनतम मानदेय 24 हजार रुपए प्रतिमाह किया जाए और इसमें हर वर्ष 500 रुपए की बढ़ोतरी सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन में अन्य मांगों में सेवानिवृत्ति पर एकमुश्त पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता, दुर्घटना बीमा का फायदा और प्रतिवर्ष आयुष्मान योजना के तहत बीमा कवर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, आशा सहयोगिनों ने एएनएम भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण, महिला पर्यवेक्षक, आशा सुपरवाइजर और आशा कार्यकर्ता भर्ती में आरक्षण तथा आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट की मांग की। उन्होंने राजपत्रित अवकाश का लाभ देने, टैबलेट या लैपटॉप की सुविधा उपलब्ध कराने और एएनएम व जीएनएम से संबंधित अतिरिक्त कार्य नहीं करवाने की भी मांग रखी। आशा सहयोगिनों ने जोर देकर कहा कि सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में काम करना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान कान्ता शर्मा, रोशनी, राजबाला, रामी, कृष्णा, शारदा, भंवरी, सीमा, हरप्रीत कौर, समेस्ता, सुनीता, सुलोचना, स्नेहलता, सुभ्रा शर्मा, पदमा शर्मा और ममता सहित बड़ी संख्या में आशा सहयोगिन मौजूद रहीं।


