राज्य में हर वर्ष 17 करोड़ के वाहन चोरी, आधे भी नहीं ढूंढ पाई पुलिस

झारखंड में वाहन चोरी अब महज एक आपराधिक घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह संगठित आपराधिक तंत्र का अहम हिस्सा बन चुकी है। राज्य में हर साल 17 करोड़ रुपए से अधिक के वाहनों की चोरी हो रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025 में झारखंड के 24 जिलों में 1539 वाहनों की चोरी हुई, जबकि 2024 में यह संख्या 1320 थी। यानी एक साल में वाहन चोरी की घटनाओं में 16.59% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वाहन चोरी के मामलों में रांची जिला राज्य में सबसे आगे है। 2025 में रांची में 162 वाहन चोरी हुए, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 92 था। इस तरह रांची में एक साल में 76% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चोरी होने वाले वाहनों में 95% टू-व्हीलर हैं, जबकि शेष 5% में फोर और थ्री व्हीलर शामिल हैं। चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन पुलिस की बरामदगी दर चिंताजनक है। 2025 में चोरी हुए 1539 वाहनों में से पुलिस केवल 609 वाहनों को ही बरामद कर सकी। यानी आधे से भी कम वाहन वापस मिल पाए। हत्याकांड जैसी जांच नहीं, इसलिए बरामदगी कम वाहन चोरी इसलिए बढ़ रही है क्योंकि इन मामलों में उतनी गंभीरता नहीं दिखाई जाती, जितनी हत्या या गोलीकांड जैसे मामलों में होती है। अधिकतर केस में अनुसंधान पदाधिकारी एएसआई स्तर के होते हैं। दो-तीन महीने बाद अंतिम प्रतिवेदन में लिख दिया जाता है कि चोरी सत्य है, लेकिन अभियुक्त की पहचान नहीं हो पाई। जिन मामलों में ईमानदारी से एफर्ट लगता है, वहां रिकवरी और गिरफ्तारी दोनों होती है। चोरी के वाहन बने अपराध व कोयला तस्करी का हथियार चोरी किए वाहन अपराध और कोयला तस्करी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहे हैं। खलारी से चोरी का कोयला बुढ़मू, ठाकुरगांव और रातू होते हुए लाने में ऐसी बाइकों का इस्तेमाल आम हो गया है। पतरातू घाटी में साइकिल से कोयला लाने वालों को चढ़ाई पार कराने में भी इन्हीं बाइकों का इस्तेमाल हो रहा है। चोरी की बाइकों पर अक्सर नंबर प्लेट नहीं होती। कोयला तस्कर 5 से 6 हजार रु. में चोरी की बाइक खरीदते हैं, छह महीने इस्तेमाल करने के बाद कबाड़ में बेच देते हैं। इसके बाद दूसरी चोरी की बाइक खरीद ली जाती है। सदर थाना: 40 वाहन चोरी {चुटिया थाना: 30 {जगन्नाथपुर थाना: 28 {कोतवाली थाना: 10 लोअर बाजार, धुर्वा, बरियातू, खेलगांव और सुखदेव नगर थाना क्षेत्रों में भी लगातार वाहन चोरी की घटनाएं सामने आई हैं।

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