दो महीने में नाइट शेल्टर में ठहरे 47 लोग, 7 डिग्री तापमान में ठंड में रात गुजार रहे बेघर

संदीप वशिष्ठ|रोपड़ जिला प्रशासन ने कड़ाके की ठंड और रात में 7 डिग्री तापमान में बेसहारा लोगों के ठहरने के लिए रोपड़ में दो नाइट शेल्टर बनाए हैं लेकिन ज्यादा जानकारी न होने के चलते पिछले दो महीने में यहां 47 लोग ही ठहरे हैं। वहीं, प्रबंधकों की मानें तो नाइट शेल्टर की जानकारी के लिए रेलवे स्टेशन और पुराना बस स्टैंड आदि पर फ्लैक्स बोर्ड लगाए गए हैं और रात को पेट्रोलिंग टीम भी बेसहारा लोगों को इसकी जानकारी देती है। हालांकि, इसके बावजूद कुछ लोग यहां आने से इंकार कर देते हैं।ज्ञानी जैल सिंह नगर के नाइट शेल्टर में सर्दी शुरू होने से लेकर अब तक 10 लोग ठहरे हैं और अब यहां लेबर रह रही है। इसी तरह सिविल अस्पताल के नजदीक बने नाइट शेल्टर में 37 के करीब लोग ठहरे हैं। सिविल अस्पताल के साथ खाली पड़ी जमीन में बनाए नाइट शेल्टर की दो मंजिला इमारत में नगर कौंसिल ने बेसहारा लोगों के ठहरने लिए बिस्तर, गद्दे, कंबल, बाथरूम व पानी का प्रबंध किया गया है। यहां नगर कौंसिल ने देखरेख लिए एक मुलाजिम तैनात किया गया है और इसमें 23 बिस्तर लगे हैं लेकिन बहुत कम लोग ही यहां ठहरना पसंद करते हैं। कई बार देखने में आया है कि शहर में ज्यादातर बेसहारा लोग दुकानों के आगे बने बरामदों में ही रात काटते हैं लेकिन नाइट शेल्टरों में नहीं जाते हैं। अब इसकी असल वजह क्या है, ये भी वे बताने से इंकार कर देते हैं और पूछने पर बस यही कहते हैं कि उन्हें जानकारी नहीं और वे जहां हैं, वहीं खुश हैं। नगर कौंसिल के प्रबंधक प्रवीन ने बताया कि दोनों नाइट शेल्टर में मुलाजिम तैनात किए गए हैं। ये शेल्टर शाम को 6 बजे के करीब खोल दिए जाते हैं। लोगों को इनकी जानकारी को पुराने बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर फ्लैक्स बोर्ड लगाए गए हैं। इसके साथ ही रात के समय पैट्रोलिंग टीम भी बेसहारा लोगों से अपील करती है कि वे नाइट शैल्टर में रात गुजारें मगर वे मना कर देते हैं। नए नाइट शेल्टर में 50 के करीब लोगों के रहने का इंतजाम है लेकिन फिलहाल पुरुषों के लिए ग्राउंड फ्लोर पर 13 बेड और पहली मंजिल पर महिलाओं के लिए 10 बिस्तर लगाए गए हैं। कबाड़ का काम करने वाले अखिलेश (बाएं) तीन साल से नंगर रोड पर एक दुकान के बरामदे में सो रहे हैं। जब नाइट शेल्टर का पूछा तो कहने लगे कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं। यही बात दो साल से बरामदे में सोन वाले सुरिंदर सिंह ने बताई। उनका कहना था कि वे बरामदे में ही ठीक हैं।

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