कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) द्वारा आयोजित वन रक्षक और जेल प्रहरी संयुक्त भर्ती परीक्षा(2022-23) के परिणाम पर सवाल उठ रहे हैं। जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा के टॉपर सतना के राजा भैया प्रजापति को 100 में से 101.66 अंक मिले हैं। इस मामले में ईएसबी के अधिकारियों का तर्क है कि रिजल्ट नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया के तहत घोषित किया जाता है। इसमें किसी को कुल अंक से ज्यादा और किसी को शून्य से भी कम अंक मिल सकते हैं । इसका उल्लेख रूल बुक में भी है। ईएसबी ने मई-जून 2023 में इस परीक्षा का आयोजन किया था। इसमें करीब 6 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए थे। दो साल बाद यह परिणाम घोषित किया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसे समझना कठिन है। रिजल्ट प्रणाली पर सवाल
अभ्यर्थी राज पांडेय ने कहा कि पहले पटवारी परीक्षा में रोल नंबर और डेट ऑफ बर्थ डालकर स्कोरकार्ड देखा जा सकता था। अब इसमें आधार के अंतिम चार नंबर और माता का नाम भी अनिवार्य कर दिया गया है। यह प्रक्रिया जटिल बन गई है। इससे दूसरे अभ्यर्थियों के परिणाम देखना संभव नहीं है। उनका मानना है कि यह बदलाव पटवारी परीक्षा के विवाद के बाद किया गया है ताकि गलतियां छिपाई जा सकें। यह है नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया नॉर्मलाइजेशन एक सांख्यिकीय प्रक्रिया है। मान लें कि एक परीक्षा दो शिफ्ट में होती है। पहली शिफ्ट का पेपर दूसरी के पेपर से कठिन है। ऐसे में पूरी परीक्षा को एक समान प्रक्रिया में लाने के लिए नार्मलाइजेशन किया जाता है। अलग-अलग शिफ्टों में पेपर का लेवल अलग-अलग होने के कारण, बिना नॉर्मलाइजेशन के एक ही अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों का प्रदर्शन समान नहीं हो सकता है। विशेषज्ञ बोले… प्रक्रिया ही गलत है
बीयू के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. एचएस त्रिपाठी ने बताया कि ईएसबी द्वारा अपनाई गई नार्मलाइजेशन की प्रक्रिया ही गलत है। भले रूल बुक में कुछ भी हो, लेकिन सांख्यकी के नियम के तहत किसी अभ्यर्थी को अधिकतम अंक से ज्यादा नंबर नहीं मिलना चाहिए और न्यूनतम अंक से कम नहीं मिलना चाहिए।


