साल की चार बड़ी चौथ में से एक माही चौथ का व्रत मंगलवार को किया जाएगा, जिसे तिल चौथ भी कहते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग होने के साथ ही मंगलवार के दिन चतुर्थी आने से अंगारक योग भी बनेगा। इस बार चतुर्थी तिथि का क्षय हुआ है। ऐसे में उदियात में तृतीया होने, लेकिन रात को चंद्रोदय के समय चतुर्थी आने से मंगलवार को ही यह व्रत किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं. दिनेश मिश्रा ने बताया कि तिल चतुर्थी पर 6 जनवरी को माताएं बच्चों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रख गणेशजी की पूजा करेंगी। तिल से बनी वस्तुओं तिलकुट्टा और तिल के लड्डुओं का भोग लगाएंगी। चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बाद व्रत का पारण होगा। अपनी कुल परंपरा के अनुसार रात में दाल-बाटी-चूरमे और अन्य व्यंजनों का चौथ माता, गणेशजी और चंद्रमा को भोग लगाया जाएगा। दिनभर निराहार व्रत कर रात को चंद्रोदय होने पर चांद को अर्घ्य देकर महिलाएं व्रत खोलेंगी। {सुबह 8:20 बजे से 7 जनवरी को सूर्योदय पूर्व सुबह 6:53 बजे तक रहेगी चतुर्थी तिथि। {इस बार माघ चतुर्थी तिथि का क्षय हुआ है। ऐसे में यह व्रत तृतीया युक्त चतुर्थी में ही होगा। {तिल चतुर्थी का चंद्रोदय रात 9:04 बजे होगा। {इस दिन प्रीति और सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा जो सबके लिए मंगलकारी रहेगा।


