दोनों लैब की रिपोर्ट विरोधाभासी दाना ओली स्थित जिस दुकान से जब्त मावे को अवमानक (सब-स्टैंडर्ड) बताकर एडीएम ने 2 लाख का जुर्माना लगाया था। 19वें जिला न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह परिहार ने उस आदेश को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने माना कि मावा दो लैब में जांचा गया। दोनों लैब की रिपोर्ट परस्पर विरोधाभासी हैं। एडवोकेट संजय बहिरानी ने बताया-12 मार्च 2022 को मदनलाल राठौर आपागंज की मोर बाजार स्थित फर्म पर टीम जांच के लिए पहुंची। खाद्य सुरक्षा अधिकारी सतीश कुमार धाकड़ की अगुवाई में टीम ने मावे की दो डलिया में से सैंपल लिए। जांच रिपोर्ट में मावा अवमानक बताया गया। इसके बाद दूसरी बार फिर से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया। इस बार भी नतीजा वही रहा। 9 अक्टूबर 2024 को एडीएम अंजू अरुण कुमार ने जांच रिपोर्ट के आधार पर 2 लाख का जुर्माना लगाया। इस आदेश के खिलाफ अपील की गई। न्यायालय को बताया गया कि एक तो 14 दिन के भीतर नमूने की जांच प्रयोगशाला द्वारा नहीं की गई। दोनों प्रयोगशाला की रिपोर्ट एक दूसरे के विपरीत है। राज्य प्रयोगशाला की रिपोर्ट में मिलावट का आधार फैट की कमी बताई है, जबकि मैसूर स्थित प्रयोगशाला में फैट सही पाया गया। परंतु मावे में शक्कर की उपस्थिति बताते हुए नमूना अमानक घोषित किया गया जबकि राज्य प्रयोगशाला की रिपोर्ट में शक्कर नहीं पाई गई थी।


