नमस्कार अजमेर में विधायक लिखी कार में घूमते पूर्व विधायक जी को पत्रकार ने पकड़ा, सवाल किया तो उन्होंने अजीबोगरीब तर्क दिया। उदयपुर में कांग्रेस नेता के गले में फूलमालाएं डाली गईं, कंधे पर उठाकर जुलूस निकाला गया, इस जश्न का कारण चौंकाने वाला है। भीलवाड़ा पुलिस को कार्रवाई करने के लिए ट्रैक्टर में लेटकर जाना पड़ा और सवाई माधोपुर में लेपर्ड के लिए लगाए पिंजरे में कोई और कैद हो गया। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. स्वघोषित ‘अभूतपूर्व’ विधायक ज्ञानदेव आहूजा स्कूल में गलती करते हुए पकड़े जाने पर मास्टर जी लकड़ी के स्केल से टखनों पर चोट करते थे। इसके बाद हाथों को उलटाकर वही ‘गलती सुधारक प्रयोग’ अंगुलियों पर किया जाता था। हमने कभी नहीं कहा कि यह हमारी गलती नहीं, तुम्हारी गलतफहमी है मास्टर साब। निश्चित ही, ऐसा कहते तो ‘गलती सुधारक प्रयोगों’ की विविधता और संख्या बढ़ जाती। लेकिन, भाजपा के पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा की बात भिन्न और विशिष्ट है। पहले बता दें कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में वे 2013 से 2018 तक अलवर की रामगढ़ सीट से विधायक रहे थे। अजमेर में ज्ञानदेव आहूजा सफेद रंग की कार में घूम रहे थे। कार के आगे लाल पट्टी पर विधायक लिखा था। पत्रकार ने उन्हें टोका तो गलती मानने के बजाय तर्क दिया- मैं भूतपूर्व नहीं, अभूतपूर्व विधायक हूं। मैं हारा नहीं था। मेरा टिकट कटा था। पत्रकार को ‘ज्ञान’ देकर वे उसी कार में आगे के पथ पर निर्विरोध और निर्भीकता के साथ बढ़ गए। 2. जमानत पर छूटने के बाद नेताजी का ‘भव्य’ स्वागत शहर के पुराने मंदिर के गुंबद पर पीपल की ओट में छुपे दो मोर यह नजारा देख रहे थे। नजारे के मुताबिक नेताजी 10 दिन की जेल के बाद जमानत पर छूटे थे। समर्थकों में उन्हें एक नजर देखने की बेताबी थी। जनवरी की चिल्ड शाम के बावजूद जमघट लगा था। उन्हें देखते ही जयकारे गूंज उठे। नेताजी के गले को फूल-मालाओं से लाद दिया गया। फिर फूलमालाओं समेत कंधों पर उठाकर समर्थक शहर में जुलूस निकालने लगे। जुलूस इतना भव्य कि इसमें विधायक खुद शामिल हुए। शाम गहरा रही थी। पूरे माहौल में ढोल-नगाड़ों की ध्वनि गूंज रही थी। पीपल पर बैठे बाकी पक्षी धूम-धड़ाके के कारण उड़ गए थे। दोनों मोर वहीं जमे हुए थे। एक मोर ने दूसरे से पूछा- क्या नेताजी कोई चुनाव जीत गए हैं? दूसरा मोर चुप रहा। पहले वाले ने फिर पूछा- क्या संगठन में कोई नई जिम्मेदारी? दूसरा मोर फिर चुप रहा। पहले वाले मोर ने जोर देकर पूछा- अरावली बचा लेने का जश्न तो नहीं? अबकी बार पहले वाला मोर रोने लगा। बोला- भैये, नेताजी और इनके हिस्ट्रीशीटर दोस्त ने अपने एक साथी मोर को मारकर पका लिया था। खाने से पहले ही पुलिस ने पकड़ लिया। उसी मामले में आज जमानत पर छूटे हैं। यह कहकर दोनों मोर गले लगकर सुबकने लगे। 3. ट्रैक्टर ट्रॉली में ‘लेटकर’ मौके पर पहुंची पुलिस हालांकि यह डर चोरों में होना चाहिए कि कोई देख न ले। लेकिन भीलवाड़ा पुलिस की स्पेशल टीम ने चोरों से यह डर चुराया और इसी डर की चादर ओढ़कर ट्रैक्टर ट्रॉली में लेट गए। ट्रैक्टर वाले से कहा- भैया हमें बनास नदी के उस इलाके में लेकर चलो जहां अवैध खनन हो रहा है। दिन का उजाला था। ट्रैक्टर चल पड़ा। ट्रॉली में स्पेशल टीम के जवान दम साधे लेटे रहे। ड्राइवर के लिए अवैध खनन वाले इलाके तक पहुंचना कोई बड़ी भारी बात नहीं थी क्योंकि यह बात इलाके के बच्चे-बच्चे को पता थी कि बजरी कहां से खुद रही है। ट्रैक्टर हिचकोले खाता हुआ बनास के पेटे तक पहुंच गया। वहां 5 ट्रैक्टर ट्रॉलियों में बजरी भरी जा रही थी। कुछ मजदूरनुमा माफिया बजरी खोदकर ट्रॉलियां भर रहे थे। पुलिस टीम के मेंबर बिना अंगड़ाई तोड़े ट्रॉली से कूदे और बजरी माफिया पर टूट पड़े। 5 ट्रैक्टर और 5 आरोपी गिरफ्तार किए गए। हालांकि इलाके के लोगों में यह चर्चा आम है कि पुलिस को छुपकर जाने की क्या जरूरत थी? पूरा बल लेकर धड़ाके से जाती। यह दिखावा क्यों? जबकि कई थानों के सामने से बजरी से भरी ट्रॉलियां अक्सर गुजरती हैं। 4. चलते-चलते.. ‘अच्छा? हमारे इलाके में लेपर्ड? यह बात फोरेस्टर साहब ने चौंकते हुए उस व्यक्ति से पूछी जिसने सवाई माधोपुर के पुराना शहर इलाके से फोन किया था। वन विभाग की टीम मुस्तैद। रात में ही पिंजरा लेकर कर्मचारी निकल पड़े। अमुक व्यक्ति से पूछा कि लेपर्ड का मूवमेंट कहां दिखा था। फिर 72 सीढ़ी सरकारी स्कूल के पास मुफीद जगह देखकर टीम ने पिंजरा लगाया और इलाके के लोगों को इत्मीनान से रहने की बात कहते हुए ऐलान किया-डरो मत। सुबह तक लेपर्ड पिंजरे में होगा। सुबह हुई। पिंजरे में कुछ हिल-डुल तो रहा था। कर्मचारी डरते-सहमते पिंजरे के पास गए। फोरेस्टर साहब पीछे रह गए थे। कर्मचारी पिंजरे के बिल्कुल पास पहुंचकर बोला-फोरेस्टर साब। तीन कुत्ते कैद हो गए। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…


