विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला सिरोही में सामने आया, जहां पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के दौरे को लेकर पार्टी में दो धड़े स्पष्ट नजर आए। जिला कांग्रेस अध्यक्ष आनंद जोशी ने पायलट के दौरे की आधिकारिक सूचना तक जारी नहीं की, जबकि पूर्व जिलाध्यक्ष जीवाराम आर्य ने प्रेस नोट जारी कर कार्यक्रम की पूरी जानकारी साझा की। यह घटनाक्रम पार्टी में गहरी दरार को दर्शाता है। इस विभाजन की जड़ें 2018 के विधानसभा चुनाव तक जाती हैं, जब कांग्रेस ने जीवाराम आर्य को टिकट दिया था। उस समय वरिष्ठ नेता संयम लोढ़ा ने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। बाद में लोढ़ा को मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाया गया। इसी दौरान जीवाराम आर्य और उनके समर्थक सचिन पायलट के करीब आ गए। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के पीछे भी पार्टी की यह आंतरिक कलह एक प्रमुख कारण मानी जाती है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा इस विभाजन को दूर करने के प्रयास के बावजूद जमीनी स्तर पर गुटबाजी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। एक-दूसरे से कार्यक्रम से बना रहे दूरी
पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के सिरोही दौरे को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष आनंद जोशी ने पूरी तरह दूरी बना रखी है। ना केवल जिलाध्यक्ष बल्कि एक गुट ने खुद को इस कार्यक्रम से किनारे कर लिया है। ऐसे में अब पायलट समर्थक सिरोही मुख्यालय पर अपने नेता के बैनर होर्डिंग्स लगा रहे हैं। इन बैनर होर्डिंग्स में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का फोटो गायब है। ऐसे में सिरोही जिले में सियासी गपशप का दौर फिर शुरू हो गया है। पायलट की तस्वीर नहीं होने से हुई थी नोकझोंक
करीब एक माह पहले प्रदेश मुख्यालय में एक कार्यक्रम में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट की तस्वीर नहीं होने से नाराजगी खुलकर सामने आई थी। पायलट समर्थक विभा माथुर ने इस बात का पुरजोर विरोध किया था और प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा से तीखी नोकझोंक भी हुई थी। विभा ने तर्क दिया कि जब एक प्रमुख नेता की तस्वीर ही गायब है तो हम कांग्रेस को मजबूत करने की बात कैसे कर रहे हैं?


