जोधपुर के करवड़ थाना इलाके में फर्जी तरीके से डिग्री लेने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इसमें मंडलनाथ स्थित मयूराक्षी टीचर ट्रेनिंग कॉलेज प्रबंधन पर आरोप है कि उसने नियमों को ताक पर रखकर एक छात्रा को जाली दस्तावेजों के आधार पर बी.एड. करवाई। मामला यह है कि छात्रा ने एक ही समय में दो अलग-अलग कॉलेजों से ‘नियमित’ स्टूडेंट के तौर पर पढ़ाई पूरी कर ली, जो कि शारीरिक रूप से संभव नहीं है। सूरसागर के सोढ़ों की ढाणी तिलजी का बेरा निवासी विनोद सोलंकी की शिकायत पर, घटना के करीब 10 साल बाद, कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने आरोपी युवती और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया है। क्या है पूरा मामला? (2014-2016 का घटनाक्रम) एफआईआर के अनुसार, महामंदिर निवासी आरोपी मोनिका पुत्री नरेंद्र परिहार ने साल 2014 में राजकीय आवासीय महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज, जोधपुर में ‘टेक्सटाइल डिजाइन’ कोर्स में एडमिशन लिया। यह एक पूर्णकालिक नियमित कोर्स था। इस दौरान उसका एनरोलमेंट नंबर TD 20140074-32 था। उसने वर्ष 2015 में प्रथम वर्ष पास किया, जिसकी मार्कशीट 7 जुलाई 2015 को जारी हुई। जबकि, वर्ष 2016 में द्वितीय वर्ष पास किया, जिसकी मार्कशीट 28 जून 2016 को जारी होना बताया गया है। समानांतर चल रही थी दूसरी डिग्री परिवादी विनोद सोलंकी ने आरोप लगाया कि जिस समय मोनिका पॉलिटेक्निक कॉलेज में नियमित छात्रा थी, ठीक उसी दौरान उसने मयूराक्षी टीचर ट्रेनिंग कॉलेज, मंडलनाथ से बी.एड. का कोर्स भी ‘रेगुलर’ स्टूडेंट के तौर पर कर लिया। यहां उसके बी.एड. का एनरोलमेंट नंबर 11/21780 था। और इसके उत्तीर्ण करने की मार्कशीट 6 फरवरी 2016 को जारी हो गई। यानी 2014 से 2016 के बीच वह एक ही समय पर दो अलग-अलग परिसरों में पढ़ाई कर रही थी। फर्जीवाड़े की पोल खोलता उपस्थिति का गणित इस मामले में सबसे अहम सबूत उपस्थिति के नियम हैं, जिनका उल्लेख एफआईआर में विस्तार से किया गया है: पॉलिटेक्निक के नियम: बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन राजस्थान के अनुसार, परीक्षा में बैठने के लिए 75% उपस्थिति अनिवार्य है। इसके बिना प्रवेश पत्र जारी नहीं हो सकता। B.Ed के नियम: नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के अपेंडिक्स-4 के नियम 2.2(सी) के तहत, बी.एड. में कोर्स वर्क के लिए 80% और स्कूल इंटर्नशिप/प्रैक्टिकल के लिए 90% उपस्थिति अनिवार्य है। परिवादी का तर्क है कि यह शारीरिक रूप से असंभव है कि कोई व्यक्ति एक ही समय में दो अलग-अलग जगहों पर 75% और 90% उपस्थित रहे। कॉलेज पर मिलीभगत और ‘घोस्ट स्टूडेंट’ का आरोप एफआईआर में मयूराक्षी TT कॉलेज प्रबंधन को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने आरोपी मोनिका के साथ आपराधिक षड्यंत्र रचा। कॉलेज ने जानबूझकर उपस्थिति रजिस्टर में कूटरचना की और फर्जी हाजिरी भरकर उसे परीक्षा के लिए पात्र बताया। परिवादी ने आशंका जताई है कि मोनिका कभी कॉलेज गई ही नहीं, और हो सकता है कि परीक्षा में उसकी जगह किसी और (डमी कैंडिडेट) को बैठाया गया हो। कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर परिवादी विनोद सोलंकी ने बताया कि उसने पहले पुलिस थाना करवड़ और पुलिस कमिश्नर को 23 सितंबर 2025 को शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। हारकर उसने 14 अक्टूबर 2025 को न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या 9, जोधपुर महानगर की कोर्ट में इस्तगासा पेश किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। चूंकि अपराध की घटना वर्ष 2014 से 2016 के बीच की है (जब भारतीय दंड संहिता लागू थी), इसलिए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की जगह IPC की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है, जिसमें कूटरचना, धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करने और आपराधिक षड्यंत्र रचने की धाराओं में केस दर्ज किया है।


