सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की जोजरी, लूणी और बांडी नदियों में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण पर कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत के सख्त निर्देशों के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और जिला प्रशासन ने अवैध कपड़ा रंगाई-छपाई इकाइयों के खिलाफ अभियान शुरू किया है। बालोतरा जिले में प्रदूषण विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। कृषि कुओं पर कपड़ा इकाइयां ध्वस्त ताजा कार्रवाई में बालोतरा जिले के सिवाना उपखंड के सिणेर क्षेत्र में पहाड़ियों के बीच कृषि कुओं पर अवैध रूप से संचालित कपड़ा इकाइयों को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद की गई है। जोजरी, लूणी और बांडी नदियों में लंबे समय से औद्योगिक अपशिष्ट छोड़े जाने की शिकायतें मिल रही थीं। इस प्रदूषण से जल स्रोत दूषित हो रहे थे, जिससे आसपास के गांवों में पेयजल संकट, भूमि की उर्वरता में कमी और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा था। राजस्थान सरकार ने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए विभिन्न सामाजिक संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया था। इसके बाद अदालत ने राजस्थान सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अवैध इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए। बालोतरा लंबे समय से कपड़ा उद्योग का एक प्रमुख केंद्र रहा है। यहां वैध इकाइयों के साथ-साथ कई अवैध रंगाई-छपाई इकाइयां भी संचालित होने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। ये अवैध इकाइयां बिना किसी अनुमति और अपशिष्ट शोधन संयंत्र (ईटीपी) के रासायनिक युक्त गंदा पानी सीधे नालों, कुओं और नदी तंत्र में छोड़ रही थीं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रदूषण विभाग ने जिले में विशेष निगरानी शुरू की और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर छापेमारी तेज कर दी है।


