छतरपुर में मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में एक दिव्यांग ई-रिक्शा चालक ने नो-एंट्री वाले क्षेत्रों में रिक्शा चलाने के लिए परमिट की मांग की, जिससे अधिकारी और अन्य लोग हैरान रह गए। हाजी मुन्ना खां नाम के इस दिव्यांग चालक ने कलेक्टर से अनुरोध किया कि उसे नो-एंट्री वाले रास्तों से गुजरने की अनुमति दी जाए। ड्राइवर ने बताया कि वह वृद्ध और शारीरिक रूप से दिव्यांग है, और ई-रिक्शा चलाकर अपनी रोजी-रोटी कमाता है। उसने कहा कि मजबूरी में उसे कई बार नो-एंट्री वाले मार्गों से जाना पड़ता है, जहां पुलिस उसे रोककर चालान करती है, जिससे उसे काफी परेशानी होती है। मुन्ना खां ने कहा, “मैं दिव्यांग हूं, काम करने के लिए रास्ता चाहिए। कलेक्टर जिले का मालिक होता है, इसलिए परमिशन लेने आया हूं।” उनके आवेदन में यातायात विभाग से बस स्टैंड छतरपुर के लिए नो-एंट्री परमिट दिलाने का आग्रह किया गया था। आवेदनकर्ता ने खुद को दिव्यांग और रिक्शा चालक बताते हुए जीवन-यापन के लिए यह परमिट मांगा था। कलेक्टर ने आवेदन सुनने के बाद मुस्कुराते हुए कहा कि नो-एंट्री जैसे नियमों में व्यक्तिगत परमिट देना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यातायात नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं।


