उज्जैन में तिल चतुर्थी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर स्थित सिद्धि विनायक गणेश मंदिर में विशेष पूजन-अर्चन किया गया, वहीं श्मशान घाट स्थित दस भुजानाथ गणेश मंदिर में गजक से अनूठा श्रृंगार किया गया। महाकाल मंदिर परिसर में विराजमान अतिप्राचीन सिद्धिविनायक गणेश मंदिर में भगवान गणेश को तिल से बनी विभिन्न सामग्रियों का भोग अर्पित किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस अवसर पर भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन संपन्न हुआ। भगवान गणेश को 56 प्रकार के तिल से बने व्यंजनों का भोग चढ़ाया गया, जिसके बाद शाम को भव्य महाआरती हुई। गणेश को तिल के व्यंजन अर्पित करने का महत्व पंडित नन्नू गुरु ने बताया कि माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को तिल चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश को तिल से बने व्यंजन अर्पित करने का विशेष महत्व है। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करती हैं। इसी क्रम में उज्जैन के श्मशान घाट में स्थित विश्व प्रसिद्ध दसभुजानाथ गणेश मंदिर में भी तिल चतुर्थी का पर्व विशेष श्रद्धा के साथ मनाया गया। यहां भगवान दसभुजानाथ गणेश का तिल-गुड़ से बनी गजक से अनूठा श्रृंगार किया गया, जो अपनी भव्यता और विशिष्टता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। मंदिर समिति के अनुसार, दसभुजानाथ गणेश का यह श्रृंगार अत्यंत श्रमसाध्य होता है और इसमें कम से कम 5 घंटे का समय लगता है। सीमित सामग्री और पारंपरिक शैली में किया जाने वाला यह श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। तिल और गुड़ से सजे भगवान गणेश के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त श्मशान स्थित मंदिर पहुंचे।


