इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद उज्जैन नगर निगम सतर्क हो गया है। शासन के निर्देश पर अब शहर की पूरी जलापूर्ति पाइप लाइन का अध्ययन किया जाएगा और उसका रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्र ने बताया कि शहर की पाइपलाइनों को तीन श्रेणियों – रेड, येलो और ग्रीन कैटेगरी में बांटा जा रहा है। कमिश्नर अभिलाष मिश्र के मुताबिक, रेड कैटेगरी में पुरानी पाइप लाइनें शामिल होंगी, जिनमें लीकेज या दूषित पानी की आशंका अधिक होती है। इन पाइपलाइनों की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जाएगी। येलो और ग्रीन कैटेगरी की पाइपलाइनों में रखरखाव और शिकायतों पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। कमिश्नर ने बताया कि शहर में चल रहे खुदाई और मरम्मत कार्यों के दौरान अक्सर पाइपलाइनों में लीकेज की समस्या उत्पन्न हो जाती है। अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसे मामलों में समयबद्ध तरीके से सुधार कार्य हो। निगम के पास कॉन्ट्रैक्ट एजेंसियां और तकनीकी टीमें मौजूद हैं, जिनके रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है। नगर निगम का ध्यान अब केवल सुधार कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंट्रोल रूम सिस्टम को भी पूरी तरह सक्रिय किया जाएगा। निगम मुख्यालय और चामुंडा माता क्षेत्र के कंट्रोल रूम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा, ताकि नागरिकों की शिकायतों पर त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके। कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि इंदौर जैसी घटना उज्जैन में न हो, इसके लिए निवारक कार्रवाई की जा रही है। पाइप लाइन की स्थिति, उनकी उम्र, संभावित जोखिम और रखरखाव की पूरी जानकारी रिकॉर्ड में लाई जाएगी। इसके बाद आवश्यकतानुसार तुरंत सुधार कार्य कराया जाएगा। नगर निगम का दावा है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से दूषित पानी की समस्या, लीकेज और शिकायतों पर नियंत्रण लगेगा, जिससे नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सकेगा।


