राजस्थान हाईकोर्ट में हर महीने के दो शनिवार काम करने के फैसले के बाद बार और बेंच के बीच पैदा हुआ टकराव फिलहाल के लिए टल गया हैं। बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने इस मामले में पांच जजेज की कमेटी गठित कर दी हैं। जजेज की यह कमेटी इस मुद्दे पर बार एसोसिएशन, सीनियर एडवोकेट्स, बार कौंसिल के सदस्यों से बात करके अपनी रिपोर्ट 21 जनवरी तक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को सौपेंगी। वार्ता में शामिल रहे हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर के अध्यक्ष रणजीत जोशी और जयपुर बार के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने बताया कि हमने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को वकीलो के विरोध के बारे में अवगत कराया। हमने उनसे कहा है कि वह इस मामले में वकीलों की भावना के अनुरूप फैसला लें। फुल बैंच में इस तरह का निर्णय नहीं हो सकता
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के साथ आज वार्ता में बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के चैयरमेन भुवनेश शर्मा, राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन, जोधपुर, हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर, राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर का प्रतिनिधिमण्डल शामिल हुआ। प्रतिनिधिमण्डल ने अपने प्रतिवेदन में स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट में सुनवाई के दिन बढ़ाने का फैसला हाईकोर्ट जजेज (सैलरीज एंड कंडिशन ऑफ सर्विस) एक्ट-1954 के सेक्शन 23ए के तहत केवल राष्ट्रपति द्वारा लिया जा सकता हैं। फुल बैंच की बैठक में इस तरह का फैसला नहीं किया जा सकता हैं। साल 2026 के पहले वर्किंग डे पर कार्य बहिष्कार
इस फैसले के विरोध में सोमवार को वकीलों ने स्वैच्छिक कार्य बहिष्कार किया था। शीतकालीन अवकाश के बाद सोमवार को साल 2026 का पहला वर्किंग डे था। लेकिन वकीलों के स्वैच्छिक कार्य बहिष्कार के चलते अदालत में सुनवाई बाधित रही। हालांकि जजेज कोर्ट में रूम में बैठे। जिन मामलों में पक्षकारों ने स्वयं उपस्थित होकर बहस करनी चाही, उनकी सुनवाई हुई। लेकिन अधिकतर मामलों में केवल अगली तारीख ही दी गई। हाईकोर्ट की फुल बैंच में हुआ था निर्णय
दरअसल 12 दिसंबर को राजस्थान हाईकोर्ट की फुल कोर्ट की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि जनवरी से हाईकोर्ट अब हर महीने के दो शनिवार खुला रहेगा। इससे सालभर में 24 दिन ज्यादा काम हो सकेगा। लंबित मामलों को निपटाने में तेजी आएगी। फुल कोर्ट मीटिंग में माना गया कि अदालतों में लगातार बढ़ रहे मामलों के दबाव को देखते हुए न्यायिक समय का विस्तार जरूरी हो गया है। महीने के दो शनिवार हाईकोर्ट खुलने से न केवल लंबित मामलों की संख्या घटेगी, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी, तेज और समयबद्ध बन सकेगी।


