दतिया में तिल संकष्टी चौथ पर भारी भीड़:पुलिस ने दोपहर में पहुंचकर संभाली व्यवस्था; भक्तों ने 282 साल पुराने मंदिर में दर्शन किए

दतिया में माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी अर्थात तिल संकष्टी चौथ मंगलवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई गई। इस अवसर पर दतिया स्थित 282 वर्ष पुराने श्री बड़े गणेश मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन हुए। दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ी रही। तिल संकष्टी चतुर्थी पर महिलाओं ने अपनी संतान के सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना को लेकर व्रत रखा और विधिविधान से भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना की। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया गया। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग और आयुष्मान योग का विशेष संयोग बना। मंदिर के पुजारी ऋतु पुरोहित के अनुसार, प्रातः 6 बजे भगवान श्री गणेश का पंचामृत अभिषेक प्रारंभ हुआ, जो करीब डेढ़ घंटे तक चला। इस दौरान दूध, दही, घी, शहद और रक्त चंदन से अभिषेक किया गया। अभिषेक के समय मंदिर परिसर में अर्थवशीर्ष और श्री गणेश लक्ष्मी स्तोत्र का सामूहिक मंत्रोच्चार हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। इसके बाद भगवान श्री गजानन को सिंदूरी चोला अर्पित कर दिव्य श्रृंगार किया गया। सुबह 7.45 बजे आरती के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। रात्रि 8 बजे तक दर्शन हुए, जिसके बाद आरती के साथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। हालांकि, सुबह के समय पुलिस व्यवस्था की कमी के चलते मंदिर परिसर और आसपास भीड़ अनियंत्रित होती रही। श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण अव्यवस्था की स्थिति बनी रही। दोपहर बाद पुलिस बल मौके पर पहुंचा और मोर्चा संभालते हुए भीड़ को नियंत्रित किया। इसके बाद दर्शन व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सकी। मंदिर के पुजारी पुरोहित ने बताया कि यह मंदिर लगभग 282 वर्ष पुराना है। मान्यता है कि सन 1744 में राजा इंद्रजीत ने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए इस मंदिर की स्थापना कराई थी। इसी कारण भगवान को ‘विजय गणेश’ के नाम से भी जाना जाता है। तांत्रिक स्वरूप वाली इस प्रतिमा की पूजा विघ्न-विनाश, शत्रु पराजय और विजय प्राप्ति के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *