खंडवा जिला पंचायत की साधारण सभा में हंगामा होते-होते रह गया। अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर नियम पूछने की तैयारी थी कि बजट पर बहस हो गई। दोपहर साढ़े 3 बजे से शुरू हुई मीटिंग देर शाम 7 बजे तक चली। सबसे अहम यह रहा कि जिला पंचायत मद की 56 लाख रूपए की राशि का बराबर बंटवारा हो गया। क्योंकि, खुद अध्यक्ष अपने लिए 22 लाख रूपए के प्रस्ताव दें चुकी थीं। इसको लेकर बाकी सदस्यों में नाराजगी थी। खास बात यह रही कि अध्यक्ष पिंकी वानखेड़े ने मीटिंग से दो घंटे पहले जिला पंचायत के सोशल मीडिया ग्रुप पर मीटिंग कैंसिल कराने का मैसेज कर दिया। पंचायत एक्ट के किसी नियम का हवाला भी दिया गया। हालांकि, सीईओ नागार्जुन बी गौड़ा ने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं हैं। मीटिंग कॉल हो चुका है, सभी सदस्य पहुंचने वाले हैं। अध्यक्ष के पास कोई विशेष शक्ति नहीं है। कुछ देर बाद उपाध्यक्ष और मंत्री पिता दिव्यादित्य शाह जिला पंचायत स्थित अपने दफ्तर पर पहुंच गए। कांग्रेस से राजकुमारी सिंह तोमर, पल्लवी सिंह राठौड़, मनोज भरतकर, भाजपा के श्रीराम चौधरी, जितेंद्र भाटे आदि भी पहुंचे। इस तरह मीटिंग का कोरम पूरा होने की तैयारी थी। सदस्यों के पहुंचने की भनक लगते ही अध्यक्ष पिंकी वानखेड़े भी पहुंच गईं और मीटिंग अटेंड की। शुरुआत में संयुक्त कलेक्टर निकिता मंडलोई को एडिशनल सीईओ का चार्ज दिया गया। 16 सदस्य, एक कार्यालय में 56 लाख का बंटवारा
जिला पंचायत सदस्यों को क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए निधि मिलती हैं। इस वित्तीय वर्ष में 56 लाख रूपए का बजट आवंटित हुआ है। अध्यक्ष पिंकी वानखेड़े ने अपने क्षेत्र के लिए 20 लाख के प्रस्ताव दे दिए। सीईओ ने साधारण सभा का हवाला देकर प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी थी। मीटिंग में यह तय हुआ कि 16 सदस्यों में बराबर बंटवारा होगा। 17वां हिस्सा जिला पंचायत कार्यालय को महिला शौचालय के निर्माण के लिए दिया जाएगा। इस तरह प्रत्येक सदस्य को उनके हिस्से में 3 लाख 35 हजार रूपए मिले। मीटिंग में अधूरी जानकारी लेकर आए दो कर्मचारियों का एक हफ्ते का वेतन काटने के निर्देश दिए गए।


