राजधानी रायपुर में महिलाओं के रोजगार के उद्देश्य से बनाई गई पहली गारमेंट फैक्ट्री अब तक शुरू नहीं हो सकी है। मोवा क्षेत्र में करीब तीन साल पहले चार करोड़ रुपए की लागत से इसका इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया था, लेकिन संचालन आज तक शुरू नहीं हो पाया। हालात यह हैं कि अफसरों को भी यह स्पष्ट नहीं है कि फैक्ट्री कब चालू होगी। फैक्ट्री का संचालन पीपीपी मोड पर महिलाओं द्वारा किया जाना था। इसके लिए कई बार नियम और शर्तों में बदलाव किए गए और ऑनलाइन टेंडर भी जारी किया गया, लेकिन अब तक कोई कंपनी या समिति संचालन के लिए आगे नहीं आई। गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाली महिलाओं को उचित रोजगार देने के साथ ही उनके बनाए कपड़ों की बिक्री पर कमीशन भी दिया जाना है। इतना ही नहीं इसी फैक्ट्री में युवतियों को कपड़ा बनाने की ट्रेनिंग भी दी जाती। जिससे वे बाद में खुद का कारोबार या किसी अन्य संस्थान में काम कर पाती। लेकिन अभी तक फैक्ट्री शुरू नहीं होने की वजह से कोई भी काम शुरू नहीं हो पा रहा है। 1000 महिलाओं को मिलना था रोजगार, महापौर बोलीं-जल्द फैसला लेंगे परियोजना के तहत एक हजार जरूरतमंद महिलाओं को नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर फैक्ट्री में ही रोजगार देने और एक हजार सिलाई मशीन लगाने का प्रावधान था। यह 15 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट था, लेकिन बाद में शर्तें बदल दी गईं। अब महापौर मीनल चौबे का कहना है कि गारमेंट फैक्ट्री संचालन के लिए दूसरे प्लान पर काम किया जाएगा। जल्द ही जनहित में फैसला लेंगे। दंतेवाड़ा में फैक्ट्री चालू,लेकिन रायपुर में अटकी नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में गारमेंट फैक्ट्री शुरू हो चुकी है, लेकिन रायपुर नगर निगम के अफसर सारी सुविधाएं होने के बावजूद इसे रायपुर में शुरू नहीं कर पा रहे हैं। बार-बार शर्तों में बदलाव कर टेंडर को ऑनलाइन उलझा दिया जा रहा है। फैक्ट्री शुरू होती तो हजारों महिलाओं को सीधे रोजगार मिलता। उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती। लेकिन अफसरों की लापरवाही की वजह से यह फैक्ट्री अब तक शुरू नहीं हो पाई।


