भास्कर न्यूज|गुमला साल की पहली अमावस्या 18 जनवरी को पड़ रही है। यह माघ मौनी अमावस्या होगी। इसे माघी अमावस्या भी कहते हैं। यह वर्ष की सबसे पवित्र अमावस्या मानी जाती है। इस दिन मौन व्रत, पवित्र नदियों में स्नान व दान-पुण्य का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता भी है कि मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष प्राप्ति के योग बनते हैं। सूर्य व विष्णु जी की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस दिन पूर्वाषाढ़ा व उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और हर्षण योग, बज्र योग, सर्वार्थ सिद्धि योग व अमृत सिद्ध योग का संयोग रहेगा। पंडित हरिशंकर मिश्रा के अनुसार 18 जनवरी को माघ कृष्ण पक्ष में मौनी अमावस्या पड़ेगी। इस दिन सुबह 10: 29 बजे तक पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र और फिर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र लगेगा। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र अगले दिन 19 जनवरी को सुबह 10:14 बजे तक रहेगी। हर्षण योग, बज्र योग, सर्वार्थ सिद्धि योग व अमृतयोग मौनी अमावस्या को खास बनाएंगे। पंडित हरिशंकर मिश्रा के अनुसार मौनी अमावस्या पर दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन ऊन से बने सामान का दान करना चाहिए। पितरों को तर्पण करना चाहिए। पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान होती है। मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा का जल अमृतमय हो जाता है। जो साधक इस दिन पर गंगा स्नान करता है, उसके जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। कई साधक पूरे माघ माह में रोजाना गंगा में पवित्र डुबकी लगाने का संकल्प लेते हैं। नदी में डुबकी लगाएंगे लोग : मौनी अमावस्या पर कोयल नदी में लोग स्नान करने जाएंगे। डुबकी लगाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करेंगे। प्रयागराज में माघ मेला चल रहा है। इसमें गुमला से भी बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज संगम में स्नान करने जाएंगे। इस दिन गुमला के विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होगी।


