सर्दी अब अपने पूरे परवान पर है। कई दिनों से दिन की धूप गायब है। मंगवालर को रात में ओस, अलसुबह कोहरा, ऊपर से उत्तरी हवाओं ने शहर को कंपा दिया। हालात तब और दिक्कतभरे हो गए जब दिन में भी धूप नहीं निकली। इसलिए रात में से ठिठुर रहे लोगों को दिन में भी राहत नहीं मिली। दरअसल सर्दी का असली दौर चल रहा है। मकर संक्रांति तक सर्दी का यही प्रकोप जारी रहेगा। हाड़ कंपाने वाली सर्दी से शहर ठिठुरने लगा। दिन भी रात जैसा महसूस हो रहा है। रात में ओस गिर रही है। सुबह कोहरा छाया रहा। ओस और कोहरे की बूदों से चबूतरे गीले हो गए। गाड़ियों के शीशों पर नमी साफ देखी गई। उसके बाद चली उत्तरी हवाओं ने ओस और कोहरे का असर और बढ़ा दिया। जिसकी वजह से हाथ पैर की उंगलिया मानो सुन्न सी हो गई। सर्दी से फिर भी राहत नहीं मिली। इस बीच न्यूनतम तापमान 8.5 डिग्री रहा मगर इसका अहसास 5 डिग्री जैसा रहा। सवाल : प्रैक्टिकल-सिलेबस 10वीं-12वीं के अधूरे, छोटे बच्चों के स्कूल क्यों खुले?
कहने को तापमान 7 से 8 डिग्री के बीच है। मगर अहसास 5 डिग्री जैसा है। कलेक्टर ने सिलेबस और प्रैक्टिकल को आधार बनाते हुए स्कूल की छुट्टियां करने से इंकार किया है। मान लेते हैं कि प्रैक्टिकल और सिलेबस 10वीं और 12वीं के अडचन डाल सकते हैं। ये बच्चे भी बड़े होते हैं। मगर कक्षा 1 से 5वीं और आठवीं तक के बच्चों का क्या दोष जो छोटे भी होत हैं और नाजुक भी। प्रदेश के एक दर्जन से ज्यादा जिलों में इसी तापमान को आधार बनाते हुए छुट्टियां की गई है। फिर बीकानेर में ये जिद क्यों? शहर से बाहर पारा 60 तक, पाळे से बचाव शहर के बाहर बीछवाल एरिया में तापमान शहर से 2 से 3 डिग्री कम रहता है क्योंकि वहां हरियाली के साथ खुला इलाका और पानी का भंडार है। बावजूद इसके जनवरी का पूरा महीना बीतने काे है मगर अब तक पाळे से फसलें बची हुई है मगर अब अगर दाे से तीन डिग्री भी तापमान कम हुआ ताे फसलों काे पाळे से खतरा हाे सकता है। ऐसे में किसानों काे समझदारी से काम लेना हाेगा। अगर दिनभर हवा चले और शाम को थम जाए तो रात में कोहरा या पाळा पड़ने की पूरी संभावना है। इसलिए फल-फूल दार पौधों को रात में बचाकर रखें।


