बीकानेर सर्राफा बाजार में मंगलवार को चांदी की कीमतों ने एक बार फिर कारोबारियों और ग्राहकों को चौंका दिया। बीते साल की तुलना करें तो चांदी में करीब 184 प्रतिशत और सोने में लगभग 79 प्रतिशत का जबरदस्त इजाफा दर्ज किया गया है। एक जनवरी 2025 को 90,500 रुपए प्रति किलो बिकने वाली चांदी 6 जनवरी 2026 को 2 लाख 57 हजार रुपए तक पहुंच गई, जबकि सोना 78,800 रुपए से उछलकर 1 लाख 41 हजार 200 रुपए प्रति दस ग्राम हो गया। इस बेतहाशा तेजी ने बाजार की रफ्तार ही बदल दी है। सोमवार को चांदी 2 लाख 46 हजार रुपए प्रति किलो पर बंद हुई थी। मंगलवार को बाजार खुलते ही भाव 2 लाख 50 हजार तक पहुंच गए। इसके बाद करीब 10 बजे से तेजी का सिलसिला शुरू हुआ, जो रात आठ बजे तक 2 लाख 57 हजार रुपए प्रति किलो पर जाकर थमा। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण बाजार में खरीदारी लगभग ठप हो गई है। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि चांदी के ऊंचे दामों ने गहनों की मांग को बुरी तरह प्रभावित किया है। बीकानेर में काम करने वाले मराठा और बंगाली कारीगरों के लिए हालात किसी लॉकडाउन से कम नहीं हैं। नए ऑर्डर लगभग रुक चुके हैं, क्योंकि ग्राहक कीमत सुनते ही पीछे हट जा रहे हैं। वैवाहिक सावे… मल मास के बाद शादियों में बढ़ेगा खर्च मल मास समाप्त होने के बाद जिन घरों में वैवाहिक सावे हैं, उनके लिए यह तेजी बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकती है। पिछले साल जहां 1 किलो चांदी पर करीब 90 हजार रुपए खर्च होते थे, वहीं इस साल उसी मात्रा के लिए ढाई लाख रुपए से ज्यादा चुकाने पड़ेंगे। यानी केवल चांदी के आभूषणों पर ही डेढ़ से पौने दो लाख रुपए अतिरिक्त खर्च करने होंगे। एक्सपर्ट के अनुसार जल्दबाजी में भारी खरीदारी से बचें। जरूरत के अनुसार चरणबद्ध खरीद करें। निवेश के लिए लंबी अवधि का नजरिया रखें। कीमतें स्थिर होने के संकेत मिलने तक प्रतीक्षा करना समझदारी होगी। चांदी और सोने की मौजूदा तेजी ने जहां बाजार में हलचल मचा दी है। सर्राफा बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि आने वाले 15 दिनों में चांदी की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय संकेत, सीमित सप्लाई और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के कारण तेजी की धारणा बनी हुई है। ऐसे में आमजन को जल्दबाजी में खरीदारी से बचने और जरूरत के हिसाब से ही निवेश करने की सलाह दी जा रही है। अगले 15 दिन और भारी पड़ सकते हैं सट्टेबाजी और वैश्विक नीतियों का असर: सर्राफा कारोबारी मुकेश जांगिड़ ने बताया कि चांदी में इस समय सटोरिया प्रवृत्ति हावी है। अमेरिका और चीन की आर्थिक व व्यापारिक नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी मजबूत बनी हुई है। इसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ रहा है। सोने में भी सुरक्षित निवेश की धारणा के चलते तेजी बनी हुई है।


