पंडरिया ब्लॉक के वनांचल क्षेत्रों में सरकारी राशन व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जनवरी का चावल अब तक कुई, कुकदूर, राशन कार्डधारियों और बदना गांवों के राशन दुकानों में नहीं पहुंच पाया है। नतीजतन सैकड़ों राशनकार्डधारी परिवारों को चावल नहीं मिल पा रहा है। हालात यह है कि आदिवासी और गरीब परिवारों के सामने रोजमर्रा के भोजन का संकट खड़ा हो गया है, वहीं स्कूलों में मध्याह्न भोजन और छात्रावास-आश्रमों की भोजन व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी है। इन चारों गांवों की राशन दुकानों का संचालन आदिवासी सेवा सहकारी समिति राशन कार्डधारियों द्वारा किया जाता है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत हर माह ग्रामीणों को यहीं से चावल वितरित किया जाता है। इसके अलावा प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में संचालित मध्याह्न भोजन योजना, कन्या छात्रावास, बालक छात्रावास और आश्रमों के लिए भी चावल की आपूर्ति इसी सोसाइटी से होती है। लेकिन जनवरी का चावल समय पर नहीं पहुंचने से पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। राशन आपूर्ति में देरी का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। कुई और कुकदूर क्षेत्र की कई शैक्षणिक संस्थाएं भी इसी राशन प्रणाली पर निर्भर हैं। कुई राशन दुकान के अंतर्गत एक प्राथमिक शाला, एक माध्यमिक शाला, एक कन्या छात्रावास और दो आश्रम संचालित हैं। वहीं कुकदूर राशन दुकान के अधीन दो प्राथमिक स्कूल, एक माध्यमिक स्कूल और तीन छात्रावास आते हैं। इन संस्थानों में मध्याह्न भोजन योजना और छात्रावास-आश्रमों में बच्चों के लिए नियमित भोजन की व्यवस्था चावल पर ही निर्भर रहती है। चावल की आपूर्ति नहीं होने से शिक्षकों और छात्रावास प्रभारियों के सामने बच्चों के भोजन की व्यवस्था को लेकर परेशानी खड़ी हो गई है। यदि जल्द चावल नहीं पहुंचा तो मध्याह्न भोजन योजना प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। खाद्य विभाग ने दी सफाई इस संबंध में खाद्य निरीक्षक हिमांशु केसरवानी ने बताया कि केवाईसी प्रक्रिया और भंडारण से जुड़े कारणों की वजह से जनवरी माह के चावल की आपूर्ति में देरी हुई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भंडारण का कार्य चल रहा है और जल्द ही संबंधित सोसाइटी में खाद्यान्न भिजवाने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि ग्रामीणों और संस्थानों को चावल मिल सके। वनांचल में बार-बार ऐसी स्थिति, देरी से मिलता है ग्रामीणों का कहना है कि वनांचल क्षेत्रों में राशन की आपूर्ति अक्सर देरी से होती है। सड़क, परिवहन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का हवाला देकर हर बार देरी को टाल दिया जाता है, लेकिन इसका खामियाजा गरीब परिवारों और बच्चों को भुगतना पड़ता है। दूरस्थ इलाकों में समय पर निगरानी नहीं होने के कारण समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं। प्रशासन से मांग की है कि राशन वितरण व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए और जनवरी का चावल तत्काल दिया जाए।


