पिछले 48 साल से शहर के लिए परेशानी बनी आरा मशीनों की शिफ्टिंग को लेकर आखिरकार सहमति बन गई है। फरवरी माह में बरखेड़ी फाटक से भारत टॉकीज की ओर स्थित करीब 40 आरा मशीनों को शिफ्ट किया जाएगा। इन मशीनों को शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर परवलिया स्थित छोटा रातीबड़ में स्थानांतरित किया जाएगा। प्रत्येक आरा मशीन संचालक को न्यूनतम दर पर 5 हजार वर्गफीट का प्लॉट दिया जा रहा है। मंगलवार को शहर एसडीएम दीपक पांडे के कार्यालय में हुई बैठक में मशीन संचालकों ने फरवरी से शिफ्टिंग पर सहमति दी। प्रशासन के अनुसार छोटा रातीबड़ में 40 प्लॉट तैयार कर लिए गए हैं। यहां 18 एकड़ क्षेत्र में लघु उद्योग विभाग द्वारा फर्नीचर क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। राजधानी में पहले चरण में एम्स से करोंद के बीच मेट्रो रूट पर आ रही 40 आरा मशीनों को फरवरी तक शिफ्ट किया जाएगा। इन मशीनों को उद्योग के रूप में शामिल किया गया है, जिससे इन्हें सरकारी सब्सिडी का लाभ भी मिलेगा। एम्स से करोंद तक मेट्रो का कुल रूट 14.99 किलोमीटर लंबा है। इसमें से एम्स से सुभाष नगर तक 6.22 किलोमीटर के हिस्से पर कमर्शियल रन शुरू हो चुका है, जबकि सुभाष नगर से करोंद तक 8.77 किलोमीटर हिस्से पर निर्माण कार्य जारी है। कारोबारियों ने एक साथ शिफ्टिंग की मांग रखी टिंबर मर्चेंट एंड आरा मशीन एसोसिएशन के अध्यक्ष बदर ए आलम ने बताया कि कारोबारियों की मांग है कि छोटा रातीबड़ में सभी आरा मशीनों को एक साथ शिफ्ट किया जाए, ताकि कारोबार प्रभावित न हो। हालांकि प्रशासन ने शिफ्टिंग दो चरणों में करने का निर्णय लिया है। शिफ्टिंग की प्रक्रिया… इस तरह से की जा रही है आग की घटनाओं के बाद शिफ्टिंग की कवायद तेज
पिछले दो महीनों में आरा मशीनों में लगातार लगी बड़ी आग की घटनाओं के बाद शिफ्टिंग की प्रक्रिया तेज हो गई। आरा मशीन संचालक लंबे समय से स्थानांतरण की मांग कर रहे थे, लेकिन छोटा रातीबड़ में विकास कार्य की धीमी गति के कारण शिफ्टिंग नहीं हो पा रही थी। आग की घटनाओं के बाद यहां विकास कार्यों में तेजी लाई गई है। आरा मशीनों की शिफ्टिंग के लिए दो चरणों की योजना बनाई गई है। पहले चरण में मेट्रो कार्य के लिए बाधा बन रही 40 आरा मशीनों को शिफ्ट किया जाएगा। दूसरे चरण में शेष मशीनों को हटाया जाएगा। पहले चरण का काम इसी महीने शुरू हो जाएगा। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर


