राजधानी में मेट्रो प्रोजेक्ट अब जनता के लिए सुविधा कम और “सिरदर्द’ ज्यादा साबित हो रहा है। मेट्रो प्रशासन न तो ट्रैफिक पुलिस की सुन रहा है और न ही पीडब्ल्यूडी की। सोमवार को पीएचक्यू के सामने मेट्रो ने बिना किसी पूर्व सूचना या वैकल्पिक मार्ग के खुदाई शुरू कर दी, जिससे आधा रोड ब्लॉक हो गया। यही हाल प्रभात चौराहा से पुल बोगदा का है, जहां बैरिकेड्स लगाकर सड़क को आधा कर दिया गया है और उड़ती धूल के कारण लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। कागज पर प्लान, जमीन पर ट्रैफिक जाम – बीते एक महीने में ट्रैफिक पुलिस, पीडब्ल्यूडी और मेट्रो प्रबंधन के बीच तालमेल को लेकर तीन दौर की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन नतीजा सिफर है। मेट्रो को नियम के मुताबिक सड़क ब्लॉक करने से 7 दिन पहले ट्रैफिक पुलिस को सूचित करना था और जितना हिस्सा कवर किया गया, उतना ही वैकल्पिक रोड बनाकर देना था। हकीकत यह है कि वैकल्पिक रास्तों के नाम पर सिर्फ गड्ढे और धूल मिली है। शहर के यह 5 पेन एरिया 1. भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म -6 का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है। यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है।
2. पुल बोगदा से लेकर प्रभात चौराहा तक सबसे ज्यादा परेशानी है। समय-समय से ज्यादा सड़क का ब्लॉक लिया जा चुका है। लोग बहुत परेशान हैं।
3. डिपो चौराहा से लेकर भदभदा चौराहा तक जितना रोड लिया गया है, उसके मुकाबले वैकल्पिक रोड बनाकर नहीं दिया।
4. पीएचक्यू के सामने दो ब्लॉक बिना किसी पूर्व सूचना के लिए गए।
5. पिपलानी इलाके में बीमा अस्पताल के सामने के सामने दोनों तरफ के रोड पर बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं। यह करना था मेट्रो प्रबंधन को 1. जितना रोड कवर किया, उतना ही रोड वैकल्पिक रोड के रूप में बनाकर देना था। रखरखाव भी करना था। यानी खराब होने पर रिपेयर करने की जिम्मेदारी थी।
2. ट्रैफिक चलता रहे, इसके लिए ट्रैफिक पुलिस को रोड ब्लॉक करने से 7 दिन पहले सूचना देना जरूरी था।
3. जितने समय के लिए रोड ब्लॉक किया गया है, उस समय के अंदर काम पूरा करना था।
4. जहां पर रोड को खोदा, उसे पहले जैसा बनाकर देना। एमडी का बात करने से इंकार
जब इस विषय को लेकर दैनिक भास्कर संवाददाता ने मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के एमडी एस कृष्णा चैतन्य को फोन किया तो उन्होंने कहा कि मैं आपसे बात नहीं कर सकता हूं। और फोन काट दिया। जितना भी रोड कवर किया, उतना देना था, कई बार लिख चुके पत्र मेट्रो प्रबंधन को ट्रैफिक के लिए उतना रोड दिए जाना था, जितना उन्होंने कवर किया है। हम कई बार उनसे इसको लेकर पत्राचार कर चुके हैं। -वसंत कौल, एडिशनल डीसीपी, ट्रैफिक पुलिस पिपलानी बीमा अस्पताल के सामने रोड को लेकर कई बार बोला गया हमने इसी शर्त पर रोड दी है कि वे सर्विस रोड बनाकर देंगे। इसके साथ ही उसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी मेट्रो की है। पिपलानी में बीमा अस्पताल के सामने खराब रोड को लेकर हम मेट्रो प्रबंधन को कई बार लिखकर भी दे चुके हैं।
– संजय मस्के, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी भोपाल


