हाईकोर्ट ने कर्मचारी के निलंबन पर पुनर्विचार का आदेश दिया:कहा- प्रशासनिक आदेश को चुनौती देना संवैधानिक अधिकार, कदाचार नहीं

ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग के एक कर्मचारी के निलंबन मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने विभाग को कर्मचारी के निलंबन पर दोबारा विचार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह साफ किया है कि किसी सरकारी आदेश के खिलाफ अदालत जाना कर्मचारी का संवैधानिक अधिकार है, इसे कदाचार नहीं कहा जा सकता। यह मामला सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (एवीएफओ) देवेंद्र शर्मा से जुड़ा है। उन्हें 6 जून 2025 को निलंबित किया गया था और 14 जुलाई 2025 को उनके खिलाफ चार्जशीट जारी की गई थी। देवेंद्र शर्मा का कहना था कि उनका निलंबन गलत मंशा से किया गया है। शर्मा ने बताया कि विभाग ने उनके काम में बदलाव किया था, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसी बात को कदाचार मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई तब की गई, जब कोर्ट पहले ही एक पुराने मामले में विभागीय कार्रवाई पर रोक लगा चुका था। पहला आरोप किया रद्द हाईकोर्ट ने शासन के 13 जनवरी 2005 के परिपत्र और पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निलंबन कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है। किसी कर्मचारी को तभी निलंबित किया जाना चाहिए, जब उसे काम से हटाना बेहद जरूरी हो। कोर्ट ने पाया कि चार्जशीट में लगाया गया पहला आरोप सिर्फ इस आधार पर था कि कर्मचारी अदालत गया था। कोर्ट ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि न्याय मांगने का अधिकार संविधान ने दिया है और इसे कदाचार नहीं माना जा सकता। इसी कारण पहला आरोप रद्द कर दिया गया।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *