खंडवा जिले की जावर उद्वहन सिंचाई परियोजना में संयुक्त किसान संगठन ने बड़े घोटाले और धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। संगठन ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इस परियोजना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि 466 करोड़ 91 लाख रुपए खर्च होने के बावजूद 26 हजार हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य सिर्फ कागजों पर पूरा दिखाया गया है, जबकि हकीकत में अधिकांश खेत सूखे पड़े हैं। उन्होंने इसे सिंचाई योजना के बजाय भ्रष्टाचार की मिसाल बताया है। सवाल- 466 करोड़ खर्च हुए तो पानी कहां गया?
संगठन के पदाधिकारियों ने प्रशासन से तीखे सवाल किए हैं। उन्होंने पूछा कि अगर परियोजना पर 466 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, तो पानी कहां गया? दूसरा सवाल यह उठाया कि यदि सरकारी दावों के मुताबिक सिंचाई हो चुकी है, तो आज भी किसानों के खेत सूखे क्यों हैं? झूठे आंकड़े और घटिया काम के आरोप
किसानों का आरोप है कि सिंचाई के नाम पर झूठे आंकड़े और फर्जी रिपोर्ट तैयार की गई हैं। हजारों हेक्टेयर में सिंचाई का दावा किया गया, लेकिन पानी खेतों तक नहीं पहुंचा। अधूरे और घटिया निर्माण कार्य को पूरा बताकर करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया गया। पंप, पाइपलाइन और अन्य संरचनाएं कागजों में तो मजबूत दिखाई गई हैं, लेकिन जमीन पर पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं। अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत
संगठन का कहना है कि इस पूरे मामले में अधिकारियों, ठेकेदारों और एजेंसियों की मिलीभगत साफ नजर आती है। स्थिति यह है कि किसान फसल की बर्बादी झेल रहा है और जिम्मेदार लोग परियोजना का फायदा उठा रहे हैं। ड्रोन सर्वे और FIR की मांग
संयुक्त किसान संगठन ने ज्ञापन में प्रमुख रूप से निम्न मांगें रखी हैं…


