मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बुधवार को मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र मदीना नगर से इंदौर में वाटर ऑडिट की शुरुआत की। उन्होंने दूषित पानी की शिकायतें सुनीं और निरीक्षण भी किया। इस दौरान सिंघार ने मौके पर ही पानी के सैंपल लेकर जांच की और कहा कि इंदौर के कई इलाकों में अब भी दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। निरीक्षण के दौरान स्थानीय नागरिकों ने सिंघार को बताया कि नलों से बदबूदार और गंदा पानी आ रहा है, जिससे लोगों में बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। सिंघार ने कहा कि सरकार और नगर निगम की लापरवाही के चलते उन्हें खुद मैदान में उतरकर वाटर ऑडिट करना पड़ रहा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार के निकम्मेपन के कारण मुझे इंदौर में खुद वाटर ऑडिट शुरू करना पड़ा है। लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कई क्षेत्रों में आज भी दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है, जो बेहद गंभीर मामला है। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि उमंग सिंघार शहर के विभिन्न इलाकों का दौरा करेंगे। यह दौरा खासतौर पर उन क्षेत्रों में किया जा रहा है, जहां नगर निगम द्वारा गंदा पानी सप्लाई किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। दौरा सुबह 10.30 बजे शुरू हुआ, जो देर शाम तक चलेगा। इस दौरान वे नागरिकों से सीधे संवाद कर पानी की स्थिति का जायजा लेंगे। एक दिन पहले लगाए थे महापौर पर गंभीर आरोप सिंघार ने मंगलवार को मीडिया से चर्चा के दौरान इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि महापौर के कार्यालय में नोट गिनने की मशीन रखी गई है। वे पुष्यमित्र भार्गव को “जनता का महापौर” नहीं कह सकते, बल्कि उन्हें “पर्ची वाला महापौर” कहना ज्यादा उचित होगा। सिंघार ने सवाल उठाया था कि महापौर कार्यालय में नोट गिनने की मशीन क्यों लगी है। क्या ठेकेदारों से नगद भुगतान लिया जा रहा है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में संवेदनशीलता की भारी कमी नजर आ रही है। जल-प्रदूषण कांड को बताया प्रशासनिक लापरवाही उमंग सिंघार ने कहा कि अगर इंदौर वास्तव में स्वच्छ शहर होता, तो भागीरथपुरा में सीवेज मिला पानी पीने से लोगों की जान नहीं जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह से शुरू हुए जल-प्रदूषण कांड में अब तक 16 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग बीमार और हजारों नागरिक प्रभावित हुए हैं। उन्होंने इसे कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही और निर्णयों में देरी का परिणाम बताया और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।


