मकर संक्रांति का त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों की संख्या बढ़ने लगी है, लेकिन खतरनाक चाइनीज मांझे ने इस उत्सव के उत्साह पर हादसों का साया डाल दिया है। पिछले कुछ वर्षों में साधारण धागे की जगह चोरी-छिपे बिक रहे चाइनीज मांझे की वजह से प्रदेशभर सहित नागौर में कई गंभीर मामले सामने आए हैं। हाल ही में नागौर में भी एक युवक इस जानलेवा धागे की चपेट में आ गया, जिससे उसकी गर्दन पर गहरा घाव हो गया। प्रतिदिन होने वाले इन हादसों को देखते हुए अब पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड पर आ गए हैं। हादसों का सबब बना प्रतिबंधित मांझा बाजारों में प्रशासन की सख्ती के बावजूद यह जानलेवा मांझा गुपचुप तरीके से बेचा जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा लगातार दुकानों की चेकिंग की जा रही है, हालांकि कई बार टीमें खाली हाथ लौट रही हैं, लेकिन आसमान में उड़ने वाली पतंगों में अब भी भारी मात्रा में चाइनीज मांझा देखा जा सकता है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए नागौर सीओ आईपीएस जतिन जैन ने शहरवासियों और व्यापारियों के लिए एक विशेष संदेश जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पतंगबाजी हमारी संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन चाइनीज मांझे का उपयोग इंसानी जान और बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है। अधिकारी ने आगाह किया कि दुपहिया वाहन चालकों के लिए यह मांझा मौत का फंदा साबित हो रहा है, जिससे गर्दन और चेहरा कटने जैसे कई दर्दनाक हादसे पहले भी घटित हो चुके हैं। कठोर कानूनी कार्रवाई और समय की पाबंदी आईपीएस जतिन जैन ने चेतावनी दी है कि चाइनीज मांझे का भंडारण, बेचान और उपयोग करना अब भारी पड़ सकता है। प्रशासन ने इसे एक दंडनीय अपराध घोषित किया है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। केवल बिक्री ही नहीं, बल्कि इसे उड़ाने वालों पर भी पुलिस की पैनी नजर रहेगी। इसके साथ ही, पक्षियों के जीवन की सुरक्षा के लिए जिला कलेक्टर के आदेशानुसार समय की पाबंदी भी लागू की गई है। आगामी 31 जनवरी तक सुबह 6:00 से 8:00 बजे तक और शाम 5:00 से 7:00 बजे तक पतंगबाजी पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा। यह वह समय होता है जब पक्षी अपने घोंसलों से निकलते या वापस लौटते हैं। सुरक्षित त्योहार मनाने की अपील प्रशासन ने आमजन से भावुक अपील की है कि वे इस मकर संक्रांति पर केवल सूती या सामान्य मांझे का ही उपयोग करें। सीओ जैन ने कहा कि त्योहार की खुशी किसी की जान से बढ़कर नहीं है, इसलिए नियमों का पालन करें और सुरक्षित तरीके से खुशियां मनाएं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की इस नई सख्ती और चेतावनी का असर धरातल पर कितना दिखाई देता है और क्या नागौर का आसमान इस बार जानलेवा धागों से मुक्त रह पाता है।


