हनुमानगढ़ जिले में यूरिया खाद की किल्लत से किसान परेशान हैं। रबी सीजन में गेहूं की फसल के लिए यूरिया की आवश्यकता के समय खाद नहीं मिलने से किसान चिंतित हैं। राष्ट्रीय युवक परिषद ने सोमवार को जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर यूरिया की सुचारु आपूर्ति सुनिश्चित करने और खाद माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की। परिषद ने आरोप लगाया कि जिले में बड़े व्यापारी और स्टॉकिस्ट यूरिया खाद का अवैध भंडारण कर रहे हैं। इसके कारण वास्तविक जरूरतमंद किसानों को सरकारी दर पर खाद नहीं मिल पा रहा है। किसान सुबह से शाम तक सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के बाहर कतारों में खड़े रहते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। किसानों का कहना है कि इससे उनका समय, श्रम और डीजल बर्बाद हो रहा है, साथ ही उन्हें मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ रहा है। कई विक्रेताओं पर स्टॉक न होने का बहाना बनाने या अनावश्यक दस्तावेजों की मांग करने का आरोप है। किसानों ने यह भी शिकायत की कि जहां यूरिया उपलब्ध होता है, वहां बैग देने से पहले कीटनाशक, दवाइयां या अन्य कृषि उत्पाद खरीदने की शर्त रखी जाती है। इस ‘टैगिंग’ प्रथा से किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है, जबकि सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार यह प्रतिबंधित है। राष्ट्रीय युवक परिषद ने मांग की है कि जिले के सभी खाद विक्रेताओं और स्टॉकिस्टों के गोदामों की सघन जांच कर जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए। उन्होंने खाद वितरण में राजनीतिक दबाव और सिफारिश संस्कृति को समाप्त कर पारदर्शी ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने की भी अपील की। परिषद ने चेतावनी दी कि समय पर यूरिया नहीं मिलने से गेहूं की बढ़वार रुक सकती है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होंगे और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रवीण जैन के साथ महिला विंग जिलाध्यक्ष सुनीता भाटी, जिला महासचिव रामकरण वर्मा, प्रचार सहसचिव सुरेश भार्गव और सचिव दिनेश शर्मा सहित अन्य सदस्य शामिल थे।


