हिमाचल में किन्नौर के सीमावर्ती क्षेत्रों में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज योजना धरातल पर विफल साबित हो रही है। ग्राम पंचायत कुन्नो चारंग के पूर्व प्रधान पूर्ण सिंह नेगी ने बताया कि जिले की 55 पंचायतों को इस योजना में शामिल किया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। रिकांगपिओ में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि, योजना का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकना था। इसके तहत स्थानीय लोगों को जमीन और मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जानी थीं। लेकिन वास्तविकता में लोग दिल्ली, चंडीगढ़, शिमला, सोलन जैसे शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। नेगी के अनुसार, यह स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चिंताजनक है। जमीन ना होने के कारण हो रहा पलायन उन्होंने बताया कि, नोतोड़ मामलों में हजारों आवेदन लंबित पड़े हैं। स्थानीय लोगों के पास पर्याप्त जमीन न होने के कारण वे पलायन कर रहे हैं, जबकि वाइब्रेंट विलेज पॉलिसी के तहत उन्हें भूमि आवंटित की जा सकती है। पूर्व प्रधान ने राज्यपाल और सरकार से इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है, ताकि केंद्र सरकार की नीति के अनुसार स्थानीय लोगों को जमीन उपलब्ध करवाई जा सके।


