झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड सीमित सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा में केवल राज्य सरकार के ग्रुप ‘ख’ के कर्मचारियों को ही शामिल होने का अवसर दिए जाने के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने झारखंड सीमित प्रतियोगिता परीक्षा नियमावली– 2015 के प्रावधानों को सही और विधिसम्मत ठहराया। अदालत ने कहा कि इसी विषय पर पूर्व में भी एक याचिका दाखिल की जा चुकी है, जिसे खारिज किया जा चुका है। ऐसे में वर्तमान याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। यह याचिका अमित कुमार द्वारा दायर की गई थी, जिसमें नियमावली-2015 को चुनौती देते हुए कहा गया था कि केवल ग्रुप ‘ख’ के कर्मचारियों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर देना भेदभावपूर्ण है। कोर्ट ने अपने निर्णय में झारखंड हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में चंदन कुमार मामले में दिए गए आदेश का हवाला दिया। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर पहले ही न्यायिक निर्णय आ चुका है और सरकार द्वारा बनाए गए नियम संविधान एवं कानून के अनुरूप हैं। अदालत ने कहा कि सरकार को नियम बनाने का अधिकार है और नियमावली–2015 में कोई अवैध प्रावधान नहीं है।


