राज्य में पेसा नियमावली का विरोध अब तेज होने लगा है। पूर्व पंचायती राज निदेशक एवं अपर आयकर आयुक्त निशा उरांव के नेतृत्व में आदिवासी समन्वय समिति का शिष्टमंडल लोकभवन में राज्यपाल से मिला और नियमावली में संशोधन की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। निशा उरांव ने कहा कि पेसा की आत्मा ग्राम सभा में निहित है, न कि प्रशासनिक ढांचे में। आदिवासी संगठनों ने राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है। कहा कि पेसा कानून 1996 का मूल उद्देश्य पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्राम सभा को सर्वोच्च अधिकार देना था। लेकिन नई नियमावली में उन्हीं अधिकारों को सीमित कर दिया गया है। परंपरागत प्रमुखों को हाशिए पर रखा गया : लक्ष्मीनारायण समिति के संयोजक लक्ष्मीनारायण मुंडा ने कहा कि परंपरागत प्रमुखों को हाशिए पर रखकर सरकारी सचिव को नियंत्रण दिया गया। यह आदिवासी संस्कृति एवं स्वायत्तता का हनन है। ऐसे ही नगरपालिका क्षेत्रों को बाहर रखा गया, जो असंवैधानिक है। यह आदिवासी समुदायों के जल-जंगल-जमीन पर अधिकारों को छीनने का प्रयास है।


