मुरैना जिले में किसानों के विरोध के बाद कैलारस शक्कर कारखाने की भूमि नीलामी रोक दी गई है। मंगलवार को किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता करीब 800 ट्रैक्टर-ट्राॅली लेकर धरनास्थल पर पहुंचे। वे सत्याग्रह और जेल भरो आंदोलन कर रहे थे। नीलामी के दौरान जिन चार प्रतिभागियों ने राशि जमा कराई थी, उन्होंने अपने नाम वापस ले लिए। उन्होंने लिखित में बताया कि नीलामी में लगाई जाने वाली बोली बाजार के मूल्य से ज्यादा है। जिसके बाद नीलामी स्थगित कर दी गई। वहीं, कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने बताया, विरोध के बाद नीलामी रोक दी गई है। कलेक्टर अंकित अस्थाना ने आश्वासन दिया है कि शक्कर कारखाने को दोबारा शुरू किया जाएगा। अगर प्रशासन ने वादाखिलाफी की तो 26 जनवरी से दोबारा प्रदर्शन किया जाएगा। 13 साल से बंद पड़ा है शक्कर कारखाना
कैलारस का शक्कर कारखाना 13 साल से बंद पड़ा है। सरकार ने कारखाने की भूमि नीलाम करने का निर्णय लिया था। मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे शक्कर फैक्ट्री की कृषि भूमि की नीलामी प्रकिया शुरू हुई। कार्यालय के बाहर एडीएम के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात किया गया था। जमीन को खरीदने के लिए पांच खरीददारों ने 5 लाख रुपए की राशि जमा की थी। लेकिन बोली शुरू होने से पहले ही नीलामी रोक दी गई। पुलिस ने ट्रैक्टर रोके, प्रदर्शनकारियों का हंगामा
कैलारस में एमएस रोड पर ऑक्सफोर्ड स्कूल के पास धरनास्थल पर ट्रैक्टर लेकर जा रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोक लिया। जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने हंगामा कर दिया। धरनास्थल से जौरा विधायक पंकज उपाध्याय मौके पर पहुंचे। उनकी पुलिस से बहस हो गई। अपर कलेक्टर सीबी प्रसाद ने विधायक को समझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने उनकी बात नहीं मानी। पुलिस ने विधायक समेत 25 लोगों को वज्र वाहन में बैठा दिया। धरने में विधायक पंकज उपाध्याय के साथ उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे और हजारों की संख्या में कांग्रेसी और ग्रामीण मौजूद रहे। कांग्रेस विधायक बोले- सरकार कोई कदम नहीं उठा रही
प्रदर्शन के दौरान विधायक पंकज उपाध्याय ने आरोप लगाया कि किसानों के लंबे समय से चल रहे धरने के बावजूद सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। केंद्र सरकार ने बंद पड़े कारखानों को पुनः चालू करने के लिए 10 करोड़ रुपए के प्रावधान किए हैं। लेकिन राज्य सरकार की इच्छाशक्ति की कमी के चलते कैलारस शक्कर कारखाने को चालू करने की कोई पहल नहीं हो रही। 30 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हो सकता है कारखाना
कम्युनिस्ट नेता गयाराम धाकड़ ने बताया, नेशनल शुगर फेडरेशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कैलारस शक्कर कारखाना मात्र 30 करोड़ रुपए की लागत से चालू किया जा सकता है। रिपोर्ट में कारखाने की मशीनरी को आधुनिक करने और उत्पादन क्षमता 1,200 टन से बढ़ाकर 2,000 टन करने की सिफारिश की गई है। लेकिन यह प्रस्ताव अभी तक क्रियान्वित नहीं हुआ। अंबाह विधायक ने कहा- सरकार का ध्यान केवल निवेश मीट पर
अंबाह के विधायक देवेंद्र सकवार ने कहा कि प्रदेश सरकार केवल निवेश मीट पर ध्यान दे रही है, लेकिन स्थानीय उद्योगों को पुनर्जीवित करने की ओर कोई कदम नहीं उठाया गया। पूर्व विधायक मनीराम धाकड़ और बैजनाथ कुशवाहा ने बताया कि शक्कर कारखाने के साथ एथेनॉल और अन्य उत्पादों के प्लांट लगाए जा सकते हैं, जिससे किसानों और युवाओं को आर्थिक लाभ मिलेगा। इसलिए हो रहा है विरोध
कैलारस शक्कर कारखाने की शुरुआत 1972 में हुई थी। इस दौरान यहां 1200 कर्मचारी कार्यरत थे और 5 हजार किसान गन्ना का उत्पादन करते थे। इस कारण क्षेत्र के बेरोजगारों को नौकरी के लिए भटकना नहीं पड़ता था। वहीं किसान भी गन्ने की फसल को कारखाने में ही बेच देते थे, जिससे आमदनी हो जाती थी। युवाओं का कहना है कि अगर इस कंपनी की भूमि की नीलामी हो जाती है तो यहां पर कभी रोजगार का साधन उपलब्ध नहीं हो पाएगा। सरकार को चाहिए कि वह इस बंद पड़े शक्कर कारखाने को शुरू करे। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और किसान भी अपनी उपज को बेच सकते हैं।


